बुधवार, 16 फ़रवरी 2011

हम सीधे गोली मारेगे...











वो सड़क पे हत्या करता है
तुम न्याय की बाते करते हो
वो जहरीला दांत गडाता है
तुम सांप  को दूध पिलाते हो  

आखिर बात बताओ हमको
अफजल सजा  क्यों नहीं पाता
कसाब की खातिरदारी काअब 
तक अंत  क्यों नहीं आता

आखिर कब तक शेर मरेगे
तुम जैसे सियार बचाने में
वो रोज़ कतल कर जाते है
तुम लगे हो व्यापार  बढाने में

अभी  भी मौका है तुम   दे
दो फासी दोनों  हत्यारों को 
नहीं तो सजा वही पाओगे 
जो मिलती  है गद्दारों को  

सहने की सीमा ख़त्म हुई
अब दुश्मन की छाती जारेगे
कानून महज तारीखे देगा
हम सीधे गोली मारेगे












15 टिप्‍पणियां:

Tarkeshwar Giri ने कहा…

अभी भी मौका है तुम दे
दो फासी दोनों हत्यारों को
नहीं तो सजा वही पाओगे
जो मिलती है गद्दारों को


Bahut Khub

Deepak Saini ने कहा…

बहुत सुन्दर एवं सार्थक कविता

एस.एम.मासूम ने कहा…

सुंदर कविता. सही हेह है आपने.

chandra ने कहा…

आज भैया मन की बात कह दी आपने
आप की गोली जब तक चले उससे पहले हम बम्म मार देगे
आप आदेश तो करो

अमित शर्मा ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
अमित शर्मा ने कहा…

ये असल कमीने छिपे शफ्फाक पोशाको में
नित नित लूट माल भरते निज तोशाखाने में

बदनाम करें खुद करतूतों से पंथ विशेष को
की फांसी दी तो विशेष नष्ट करदेंगे देश को

अमित आस बस नेक्स्ट जेन के भरोसे है
वरना गठबंधन के लाचारी मन मसोसे है


गठबंधन की लाचारी या मन ही भ्रस्ठाचारी है
प्यादे को करके आगे खा रही विदेशी नारी है

ashish ने कहा…

सच में सहने की भी सीमा होती है . कसब और अफजल को सजा ना देना हमारी कमजोरी को ही दर्शाता है . और समय आएगा जब जनता ही ऐसे दरिंदो को सजा देगी .

Ravindra Nath ने कहा…

पवन जी आपने जनमानस की अभिव्यक्ति अपने ब्लॉग के माध्यम से सरलतम रूप मे कर दी, पर हमारे अंधे और बहरे शासन को कौन सुनाएगा यह आवाज़?

आलोकिता ने कहा…

Aakroshpurn lekin ek sarthak rachna.

Sunil Kumar ने कहा…

हमारी न्याय व्यवस्था का कोई नहीं जबाब ,
वर्षों से मेहमान है हमारा अजमल कसाव |
सही बात उठाई जय आपने मगर सुने कौन ?

अनूप शुक्ल ने कहा…

हम सीधे गोली मारेगे - बहुत खूब! रिवाल्वर के लिये अर्जी दे दी क्या?

"पलाश" ने कहा…

बात तो बहुत सटीक कही आपने , लेकिन हम सभी मे एक कमी है जिसे हमको स्वीकार करना भी चहिये , हम कहते तो बहुत कुछ है , कभी कभी लिख भी देते है ,

लेकिन क्या देश को सुधारने के लिये यह काफी है ?

क्या देश हमसे सिर्फ इतना ही चाहता है ?

आज कोई आजाद भगत क्यो नही बनता ?

क्या शब्दों की तलवार अफजलोम का सीना चीरने के लिये काफी है ?

क्या आज हम देश पर जान क्या रक्त की दो बूँद भी देने के लिये मानसिक रूप से तैयार हैं ?

"पलाश" ने कहा…

आप सभी पाट्को से अनुरोध है कि इस पोस्ट को मात्र पढे नही ।
थोडा सा सोचें भी ।
और कुछे करने की दिशा दिखाये ।

बातों का वक्त तो खत्म हुआ
अब कुछ करने की बारी है ।
जी लिये बहुत हम सभी यहाँ
अब देश् पे मर मिटने की बारी है ॥

Harshkant tripathi"Pawan" ने कहा…

सहने की सीमा ख़त्म हुई
अब दुश्मन की छाती जारेगे
कानून महज तारीखे देगा
हम सीधे गोली मारेगे.
अच्छी पोस्ट............

DEVESHWAR AGGRAWAL ने कहा…

आखिर कब तक शेर मरेगे
तुम जैसे सियार बचाने में
वो रोज़ कतल कर जाते है
तुम लगे हो व्यापार बढाने में
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ek deshbhavana ... nice post