मंगलवार, 8 फ़रवरी 2011

हंसते हुए जीवन को संवार लिया जाय











हंसते हुए जीवन को संवार लिया जाय
खुशियों से ता-उम्र का करार किया जाय

उड़ते हुए बादल मस्ती में झूमते है
मस्ती ही जीवन है हमसे ये कहते है
मस्ती में हर घड़ी को गुज़ार लिया जाय

सतरंगे इन्द्र धनुष से कुछ रंग चुराकर
सांझ की धूप को आँगन में बुलाकर
बीते हुए लम्हों को दुलार लिया जाय

निशिगंधा की महक साँसों में भरकर
ओस की बूंदों में तन मन घोलकर
खिली हुयी चाँदनी से प्यार किया जाय

हंसते हुए जीवन को संवार लिया जाय
खुशियों से ता-उम्र का करार किया जाय











10 टिप्‍पणियां:

"पलाश" ने कहा…

हम तो करार कर ले , काश खुशियां भी हमारे साथ करार करने को राजी हो ।
कौन नही चाहता जमाने मे खुश रहना
मगर किस्मत मे सबकी फूल नही होते
गुलशन के हर फूल से हम प्यार कर लेते
अगर उसकी राहों मे दर्द के शूल ना होते

ashish ने कहा…

मै भी लगा हूँ खुशियों से करार का मसौदा तैयार करने में . सुन्दर कविता.

शारदा अरोरा ने कहा…

bada hi khoobsoorat geet hai aur irada bhi ....

ehsas ने कहा…

खुशियों से करार तो हमने बचपन में ही कर लिया था लेकिन खुशियो ने ही वो करार तोड़ दिया।
बहरहाल सुंदर रचना के लिए बधाई स्वीकार करें।

Ravindra Nath ने कहा…

सरल शब्दो मे सुन्दर अभिव्यक्ति कि हमे क्या करना चाहिए। जीवन को संवारना ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए, और इसके लिए दुनियावी वस्तुए नही चाहिए, जो चाहिए उसका उल्लेख बखूबी किया है आपने, यह तो इंसान है जो इन चीजों को छोड कर दुनियावी वस्तुओं के पीछे भागता है फिर शिकायत करता है कि हम तो खुशियां चाहते हैं पर वो हमे मिलती ही नही

chandra ने कहा…

मनभावन पंक्तया
सुन्दर तरीके से प्रक्रति के नजदीक जाने की बात कही आपने

DEVESHWAR AGGRAWAL ने कहा…

उड़ते हुए बादल मस्ती में झूमते है
मस्ती ही जीवन है हमसे ये कहते है
मस्ती में हर घड़ी को गुज़ार लिया जाय

bahUt khoob likha hai janab ........LAJAVAV!!!!!!!

आलोकिता ने कहा…

Bahut khoob

Dr Kiran ने कहा…
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Dr Kiran ने कहा…

मेरा ख्याल है जीवनमे थोड़े थोड़े दुःख भी होने चाहिए इससे खुशी का मजा और हो जाता है