गुरुवार, 3 फ़रवरी 2011

मौन निमंत्रण












 
मधुवन को भीनी खुशबू से
महकाए जब रजनीगंधा
अम्बर में तारो संग संग
इतराए इठलाये चंदा

मुसकाते बलखाते झरने
लगे सुनाने गीत सुहाने
उनकी धुन पर ढलकी जाए
लोरी गाये जब संझा

मौन निमंत्रण मेरा प्रियतम
आ जाओ बन आनंदा

दीप बुझे जब जग के सारे
मन में दीप जलाना तुम
बुलबुल गीत सुनाती है तब
हौले से कदम बढ़ाना तुम

चौकड़िया भरते मृगशावक
राह दिखायेगे तुमको
मेरी बंशी की धुन
मेरा पता बताएगी तुमको

मधुर रागिनी सुनकर आली
आना तुम बन वृंदा
मौन निमंत्रण मेरा प्रियतम
आ जाओ बन आनंदा






































13 टिप्‍पणियां:

एस.एम.मासूम ने कहा…

एक अच्छी कविता पवन जी

Ravindra Nath ने कहा…

एक सुन्दर रचना, ऐसे ही लिखते रहे और प्रेम संदेश विश्व को देते रहें।

अमित शर्मा ने कहा…

@ मौन निमंत्रण मेरा प्रियतम
आ जाओ बन आनंदा

बहुत बहुत प्यारी रचना है भैया.........आनंदा के लिए लिखे आव्हान को पढ़कर मन विभोर हो उठा

"पलाश" ने कहा…

Kailash C Sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर गीत..भाव,लय और शब्दों का सुन्दर सामंजस्य..

Zakir Ali 'Rajnish' ने कहा…

अति सुंदर।

---------
ध्‍यान का विज्ञान।
मधुबाला के सौन्‍दर्य को निरखने का अवसर।

Harshkant tripathi ने कहा…

चौकड़िया भरते मृगशावक
राह दिखायेगे तुमको
मेरी बंशी की धुन
मेरा पता बताएगी तुमको.
Bahut khub,,,,,,,,,,,,,,,,

प्रेम सरोवर ने कहा…

कविता मन को मोहित कर गयी। लिखते रहो भाई।मेरे पोस्ट पर आपका निमंत्रण है।

chandra ने कहा…

थोडा देर से आया क्षमा प्राथी

chandra ने कहा…

कविता को पढ़ कर सुकून मिला
आनंदा...........

Dr Kiran ने कहा…

हमेशा की तरह निमंत्रण पर मौन स्वीक्रति

DEVESHWAR AGGRAWAL ने कहा…

दीप बुझे जब जग के सारे
मन में दीप जलाना तुम
बुलबुल गीत सुनाती है तब
हौले से कदम बढ़ाना तुम

BAHUT SUNDAR ...........

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

पवन भाई मेरा मोबाईल नं0 है- 9935923334