मंगलवार, 25 जनवरी 2011

मेरे महबूब बेतार बात हो तो अच्छा











दिल से दिल की   बात हो तो अच्छा
बात में  तेरे  जज्बात हो तो अच्छा

तारो को टूटते देखा  मैंने अक्सर,
मेरे महबूब बेतार बात हो तो अच्छा

कब तलक  टुकडो बसर ज़िदगी होगी
अब बदल जाए ये हालात तो अच्छा

ज़माने  से  ये आँखे भरी    भरी सी है
टूट के हो प्यार की बरसात तो अच्छा

लुकाछिपी क़ा खेल फ़साना बन जाएगा
इंतज़ाम मुलाक़ात के हो जाय तो अच्छा









12 टिप्‍पणियां:

निर्मला कपिला ने कहा…

बहुत सुन्दर गज़ल है ये शेर अच्छे लगे--
कब तलक टुकडो बसर ज़िदगी होगी
अब बदल जाए ये हालात तो अच्छा

ज़माने से ये आँखे भरी भरी सी है
टूट के हो प्यार की बरसात तो अच्छा

Dr Kiran ने कहा…

ये बात तो सही है
लेकिन मोबाइल कंपनियों का क्या होगा

chandra ने कहा…

बेतार बात हो तो अच्छा
क्या बात है
एक शेर याद आ गया
मै रोया परदेस में भीगा माँ का प्यार
दुःख ने दुख से बात की बिन चिट्ठी बिन तार

chandra ने कहा…

आपने माफ़ किया कि नहीं?

ashish ने कहा…

सही बात. मुलाकात तो जरुरी है प्यार में . सुन्दर और रूमानियत से भरी ग़ज़ल .

Sunil Kumar ने कहा…

कब तलक टुकडो बसर ज़िदगी होगी
अब बदल जाए ये हालात तो अच्छा
पहली बार आपके व्लाग पर आया और बहुत खुबसूरत गज़ल पढने की मिली , बधाई......

वन्दना ने कहा…

गज़ब के भाव भरे हैं……………शानदार गज़ल्।

आलोकिता ने कहा…

bahut hi umda rachna

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

Nice post.
26 जनवरी पर एक ख़ास अपील
कुदरत क़ानून की पाबंद है लेकिन इंसान क़ानून की पाबंदी को अपने लिए लाज़िम नहीं मानता। इंसान जिस चीज़ के बारे में अच्छी तरह जानता है कि वे चीज़ें उसे नुक्सान देंगी। वह उन्हें तब भी इस्तेमाल करता है। गुटखा, तंबाकू और शराब जैसी चीज़ों की गिनती ऐसी ही चीज़ों में होती है। दहेज लेने देने और ब्याज लेने देने को भी इंसान नुक्सानदेह मानता है लेकिन इन जैसी घृणित परंपराओं में भी कोई कमी नहीं आ रही है बल्कि ये रोज़ ब रोज़ बढ़ती ही जा रही हैं। हम अपनी सेहत और अपने समाज के प्रति किसी उसूल को सामूहिक रूप से नहीं अपना पाए हैं। यही ग़ैर ज़िम्मेदारी हमारी क़ानून और प्रशासन व्यवस्था को लेकर है। आये दिन हड़ताल करना, रोड जाम करना, जुलूस निकालना, भड़काऊ भाषण देकर समाज की शांति भंग कर देना और मौक़े पर हालात का जायज़ा लेने गए प्रशासनिक अधिकारियों से दुव्र्यवहार करना ऐसे काम हैं जो मुल्क के क़ानून के खि़लाफ़ भी हैं और इनसे आम आदमी बेहद परेशान हो जाता है और कई बार इनमें बेकसूरों की जान तक चली जाती है।
इस देश में क़ानून को क़ायम करने की ज़िम्मेदारी केवल सरकारी अफ़सरों की ही नहीं है बल्कि आम आदमी की भी है, हरेक नागरिक की है। 26 जनवरी के मौक़े पर इस बार हमें यही सोचना है और खुद को हरेक ऐसे काम से दूर रखना है जो कि मुल्क के क़ानून के खि़लाफ़ हो। मुल्क के हालात बनाने के लिए दूसरों के सुधरने की उम्मीद करने के बजाय आपको खुद के सुधार पर ध्यान देना होगा। इसी तरह अगर हरेक आदमी महज़ केवल एक आदमी को ही, यानि कि खुद अपने आप को ही सुधार ले तो हमारे पूरे मुल्क का सुधार हो जाएगा।
http://charchashalimanch.blogspot.com/2011/01/26th-january.html

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें.....
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हिन्‍दी के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले ब्‍लॉग।

वन्दना ने कहा…

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (27/1/2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
http://charchamanch.uchcharan.com

गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाइयाँ !!

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

धन्यवाद वंदना जी