रविवार, 16 जनवरी 2011

आदमी गायब है औ' हैवान नजर आता है





आजकल हर आदमी परेशान नज़र आता है
यह उजड़ा शहर मुझे शमशान नजर आता है.

इक पल  में जाने कैसे  बदल जाती है ज़िंदगी  
हालात से बेबस हुआ इनसान नजर आता है

शक होता है पड़ोसी की शराफत को देख कर
ईमान की बाते करता बेईमान नजर आता है

बस्तियों में ढूंढता हूँ मै दिलो में ढूंढता हूँ
आदमी गायब है औ'  हैवान नजर आता  है

धधक रही है भट्ठिया नफ़रतकी लकडियो से
मातम में डूबा सारा ज़हान नजर आता है.






15 टिप्‍पणियां:

एस.एम.मासूम ने कहा…

शक होता है पड़ोसी की शराफत को देख कर
ईमान की बाते करता बेईमान नजर आता है
.
पवन जी बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति .क्या मैं इसका हवाला अमन के पैग़ाम पे दे सकता हूँ?

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

मासूम भाई
हम आपकी मुहब्बत के कायल है आप इस ग़ज़ल को आप अमन के वास्ते दे सकते है और दुबारा मत पूछना

meri awaaj ने कहा…

यह जहाँ पत्थर का है , यहाँ लोग भी पत्थर के हैं

कुछ मेहरबान दिल से , कुछ बाहेर से हैं

इनकी सांसो में भरा है एक पथरीलापन

इनकी आँखों में हंस रहा है एक नीलापन

इनकी ख्वाबो के अश्क है जो वो जहर के हैं .....

.कुछ मेहरबान ..............

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

पवन भाई, आपकी बातें दिल को छू गयीं। बधाई।

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ज्‍योतिष:पैरों के नीचे से खिसकी जमीन।
सांपों को दूध पिलाना पुण्‍य का काम है ?
डा0 अरविंद मिश्र: एक व्‍यक्ति, एक आंदोलन।

अमित शर्मा ने कहा…

सटीक कथा है भाई जी, सुन्दर भाव !!

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ओ माँ क्या तुम झूंठ बोलती थी
तुमने कहा था दुनिया बड़ी प्यारी है
कहा था यहाँ खिली प्रेम की क्यारी है
पर मुझे तो हर बात दिखती न्यारी है
हर और फैली नफरत और गद्दारी है

Kailash C Sharma ने कहा…

इक पल में जाने कैसे बदल जाती है ज़िंदगी
हालात से बेबस हुआ इनसान नजर आता है

बहुत सटीक प्रस्तुति..हरेक शेर लाज़वाब..

वन्दना ने कहा…

एक शानदार गज़ल के माध्यम से बहुत सटीक बात कही है।बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

आलोकिता ने कहा…

Bahut hi khbsurat har baar ki tarah

chandra ने कहा…

लाजवाब है
यही दशा ब्लॉग की हो गयी है
http://kanpurbloggers.blogspot.com/2011/01/blog-post_16.हटमल
इसे देखे और काफ़िर अनवर जमाल की हकीकत समझे

'साहिल' ने कहा…

शक होता है पड़ोसी की शराफत को देख कर
ईमान की बाते करता बेईमान नजर आता है

ग़ज़ल के माध्यम से सच्ची और कडवी बातें कहीं है आपने...........बहुत खूब

Sunil Kumar ने कहा…

शक होता है पड़ोसी की शराफत को देख कर
ईमान की बाते करता बेईमान नजर आता है
.बहुत खूब

ZEAL ने कहा…

@-धधक रही है भट्ठिया नफ़रतकी लकडियो से...
Yeah, It's true. Unfortunately the flames of hatred is taking the shape of forest fire.

"पलाश" ने कहा…

आज का सत्य आपकी पोस्ट मे देखने को मिला और साथ ही एक गहन चिन्तन भी ।

दुआ करते है बदल जाये नजर बेईमान की
उसे भी मिल जाये कोई दिल लगाने की वजह

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" ने कहा…

बहुत उम्दा गजल प्रकाशित की है आपने!

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति| हरेक शेर लाज़वाब|