बुधवार, 12 जनवरी 2011

ऐ खुदा तुझ पे एहसान कर रहा हूँ













तेरी दी हुयी ज़िंदगी   जी रहा हूँ
ऐ खुदा तुझ पे  एहसान कर रहा हूँ

ऊंचे मकान वालो पर इतनी इनायत क्यूँ
मुझ पर तेरी नज़र टिके अरमान कर रहा हूँ

मस्जिद बनेगी तेरी जरा सब्र और कर
माँ की दवाई बंद कर मै दान कर रहा हूँ

 नाराज ना हो खून में डूबा नहीं खंज़र
काफिर औ' मुसलमान में पहचान  कर रहा हूँ

हुक्म की तामील में  इतनी  जल्दी भी क्या है
काजी  के फतवे क़ा  का मै ध्यान कर रहा हूँ
                
ऐ खुदा तुझ पे  एहसान कर रहा हूँ

14 टिप्‍पणियां:

एस.एम.मासूम ने कहा…

एक नयी सोंच

ehsas ने कहा…

नाराज ना हो खून में डूबा नहीं खंज़र
काफिर औ' मुसलमान में पहचान कर रहा हूँ
बहुत खुब। क्या बात है।

आलोकिता ने कहा…

तेरी दी हुयी ज़िंदगी जी रहा हूँ
ऐ खुदा तुझ पे एहसान कर रहा हूँ
bahut hi sarthak rachna sir ji

"पलाश" ने कहा…

ऐ खुदा तुझ पे एहसान कर रहा हूँ

हर हाल में खुश रह कर जीना , वाकई खुदा पर अहसान हो सकता है , क्योकि दुखी होकर जीते हुए जब खुदा बन्दे को देखता है तो उसे हमसे ज्यादा दुःख होता है | काश अहसान ही सही लोग खुश रह कर जीना सीख ले और खुशी दे कर भी

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

क्‍या कहना है पवन भाई, गजब।

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सांपों को दुध पिलाना पुण्‍य का काम है?

DEVESHWAR AGGRAWAL ने कहा…

lajawav...........

दीप्ति शर्मा ने कहा…

bahut sunder or bhavpurn rachna
....
kabhi yaha bhi aaye
www.deepti09sharma.blogspot.com

Harshkant tripathi"Pawan" ने कहा…

मस्जिद बनेगी तेरी जरा सब्र और कर
माँ की दवाई बंद कर मै दान कर रहा हूँ.
पंक्ति दिल को छू गई.

ashish ने कहा…

ऐसी ही करते रहो खुदा पर एहसान . देते रहो ऐसे ही अमन का पैगाम .

aarkay ने कहा…

ati uttam

अरूण साथी ने कहा…

मकरसंक्रांति की हार्दीक शुभकामनाए..

बहुत सुन्दर.. बधाई..

खास कर यह


नाराज ना हो खून में डूबा नहीं खंज़र
काफिर औ' मुसलमान में पहचान कर रहा हूँ

शिव शंकर ने कहा…

नाराज ना हो खून में डूबा नहीं खंज़र
काफिर औ' मुसलमान में पहचान कर रहा हूँ


पवन जी आपकी कविता दिल को सकून दे गई ।
बहुत अच्छा लगा पढ कर ।

आपको मकर संक्रांति की बधाई।

धन्यवाद ।

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत सुन्दर| मकरसंक्रांति की हार्दीक शुभकामनाए|

RAJEEV KUMAR KULSHRESTHA ने कहा…

बेहतरीन एवं प्रशंसनीय प्रस्तुति ।
हिन्दी को ऐसे ही सृजन की उम्मीद ।
धन्यवाद....
satguru-satykikhoj.blogspot.com