गुरुवार, 6 जनवरी 2011

प्री-टेक्निक युग की खुदाई












नीम का पेड़
छोटे -छोटे शालिग्राम
कुए का ठंडा पानी
और पीपल की नरम छांह

सुबह का कलेवा
'अग्गा राजा दुग्गा दरोगा'
गन्ने का रस और दही
साथ में आलू की सलोनी

गेरू और चूने से
लिपे पुते घर में
आँगन और तुलसी
दरवाजे की देहरी

ताख में रखा दिया
उजास का पहरिया
बाबा की झोपड़ी
और मानस की पोथी

लौकी की बेले
छप्पर पर आँखमिचौनी खेले

आमो का झूरना
महुए का बीनना
अधपके गेहू की
बाली का चूसना

बगल के बांसों की
बजती बांसुरी
खेत खलिहान में काम करते
बैल हमारे परिवार के

और पास में चरते
गोरू बछेरू घर के

प्री-टेक्निक युग की खुदाई में
मिली ये सारी वस्तुए
जिनको मैंने खोया था
कई बरस पहले
कई बरस पहले...............

18 टिप्‍पणियां:

ashish ने कहा…

नीम का पेड़
छोटे -छोटे शालिग्राम
कुए का ठंडा पानी
और पीपल की नरम छांह

बहुत कुछ याद दिलाती रचना.

एस.एम.मासूम ने कहा…

वाह पवन जी आपने तो अपने गाँव कि याद दिला दी. बेहतरीन अंदाज़ .

संजय भास्कर ने कहा…

लौकी की बेले
छप्पर पर आँखमिचौनी खेले

आमो का झूरना
महुए का बीनना
अधपके गेहू की
बाली का चूसना

सार्थक और बेहद खूबसूरत,प्रभावी,उम्दा रचना है..शुभकामनाएं।

संजय भास्कर ने कहा…

ऐसी कवितायें रोज रोज पढने को नहीं मिलती...इतनी भावपूर्ण कवितायें लिखने के लिए आप को बधाई...शब्द शब्द दिल में उतर गयी.

संजय भास्कर ने कहा…

baaliya khaye to jamana ho gya pawan ji........

chandra ने कहा…

खेत खलिहान में काम करते
बैल हमारे परिवार के

और पास में चरते
गोरू बछेरू घर के

सच में
सब परिवार का ही तो हिस्सा थे
आज परिवार सिर्फ मेहरिया तक सीमित हो गया

Abhinav Chaurey ने कहा…

वाह आलू की सलोनी काफी स्वादिष्ट लगती होगी। यम यम :-) मैंने अभी तक नहीं खाई।

"पलाश" ने कहा…

बहुत ही सजीव चित्रण किया है आपने गांव का ।
यह हमारा दुर्भाग्य है कि भारत जिसका दिल गाँवो मे ही बसता है , समय से भी तीव्र गति से गायब हो रहे है । अगर हम आज भी ना चेते तो शायद आने वाली पीढियो को गाँव सिर्फ किताबो मे ही मिलेंगे ।

Tarkeshwar Giri ने कहा…

Are bap re bap , apne to yar gaon ki yad dila diya.

lekin ek bat hai bahut hi badhiya likha hai pane. magar ................sochne par majbur kar diya hai apne

DEVESHWAR AGGRAWAL ने कहा…

AAPNE MUJHE GHAR KI YAD DILA DI . GAON KA NAJARA SAHAR KE MAHAUL SE 1000% PURE HOTA HAI..........NICE

arganikbhagyoday ने कहा…

वाह पवन जी आपने तो अपने गाँव कि याद दिला दी !

निर्मला कपिला ने कहा…

नीम का पेड़
छोटे -छोटे शालिग्राम
कुए का ठंडा पानी
और पीपल की नरम छांह


गेरू और चूने से
लिपे पुते घर में
आँगन और तुलसी
दरवाजे की देहरी
आपने तो हमे भी अपने गाँव की याद दिला दी। हमारे जमाने मे ही ये सब हुया करता था आजकल आपके जमाने के गाँव खुद हाईटेक हो गये हैं। अब कहाँ मिलती हैं ये चीज़्रं और सरल सुन्दर जीवन।बहुत सुन्दर रचना है। बधाई आपको।

आलोकिता ने कहा…

padhne mein yah rachna kafi achi lagi par auron ki tarah mujhe kuch yaad nahi aaya kyunki maine yah sab dekha hi nahi hahahahahahaha haan premchand ji ki kuch kahania yaad aa rahi hain.

Harshkant tripathi"Pawan" ने कहा…

आपने तो बचपन और गावं की याद दिला दी.

ZEAL ने कहा…

You made me nostalgic !

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

पवन भाई, बचपन के दिन याद आ गये, शुक्रिया।

---------
पति को वश में करने का उपाय।

amar jeet ने कहा…

प्री-टेक्निक युग की खुदाई में
मिली ये सारी वस्तुए
जिनको मैंने खोया था
कई बरस पहले
कई बरस पहले..............
अच्छी रचना

Ravindra Nath ने कहा…

पवन जी सच ही ये चीजे तोअब खुदाई मे ही मिलेगी, सरकार का पूरा प्रयत्न किसनो को समाप्त करने पर है, पहले किसानो की जमीन SEZ के लिए ली गई, फिर अब भवन निर्माण हेतु इनका अधिग्रहण हो रहा ह। देखते जाइए, ८० रुपए प्याज बिका १०० रुपये अरहर पर किसान को फिर भी आत्महत्या करनी पडी क्योंकि मुनाफा तो सिर्फ बिचौलियों को हुआ।

और अब इंतज़ार कीजीए corporate खेती का जिसे सरकार जल्द ही ला कर किसानो का बचा खुचा मनोबल तोड़ने वाली है।

यह सब आपने नही भारत ने खोया है और खोता जा रहा है।