बुधवार, 22 दिसंबर 2010

तात ये सोने का पदक मै कर रहा हूँ तुमको अर्पण

मेरे  पिताजी कानपुर में नौकरी करते थे. मेरी शुरुआती शिक्षा जौनपुर में ही हुई थी. मेरे ताउजी जो मेरी पहली पाठशाला  मार्गदर्शक माँ पिता गुरु मित्र सभी कुछ  रहे. तकरीबन मेरे सारे सवालों के जवाब उनके पास रहते. वो अक्सर मुझे टोपर विद्यार्थियों की बाते बताते. एक दिन मैंने उनसे पूछा कि आप तो दर्ज़ा दो तक की पढाए किये है आपको लगता नहीं कि आप भी टापर होते. उन्होंने कहा था  जिस दिन तेरे गले में स्वर्णपदक  पड़ेगा उसी दिन मै सब कुछ टाप कर जाउंगा. मै रात में सपना देखता कि मेरे गले में गोल्ड मेडल है और ताउजी कि आँखों में मेरे लिए आह्लाद का भाव.
मुझे १९ अक्टूबर  २००४ का दिन अभी भी बखूबी याद है. परास्नातक में मैंने यूनिवर्सिटी  टॉप किया था.
किरण ताउजी को लेकर पहली पंक्ति में बैठी थी. बार बार उदघोशक महोदय बता रहे थे कि परास्नातक में यूनवर्सिटी में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले पवन कुमार मिश्र को स्वर्णपदक  दिया जाने वाला है. ताउजी कि आँखों में  वही सपने वाले  आंसू झिलमिल कर रहे थे. मै उनके दिल से
निकले आशीषो की बारिश में खुद को भीगते देख रहा था.


(कानपुर यूनिवर्सिटी के वी.सी. प्रो एस.एस. कटियार नगरप्रमुख श्री अनिल शर्मा  और केन्द्रीय गृहराज्यमंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल  जी,  दीक्षांत समारोह के दौरान) 




मांस के लोथड़े को
तुमने इंसान में परिवर्तित किया
रक्त बनकर मेरी नसों में
मुझे गतिमान किया 
नीति कला दर्शन और जीवन का कर्मयुद्ध
ज्ञान का बोध तुम्ही से हुआ मेरे महाबुद्ध 
मेरी नन्ही उंगलियों को पकड़कर
जमीन पे "क" लिख दिया था.
वही पर  ऐ तात मेरे
प्रात मुझको दिख गया था
कभी पिता का अनुशासन  
कभी माँ क़ा दुलार बने
इतने विस्तृत थे कि जिसमे
मेरा सारा संसार बने
तुम्हारे गले में बाहे डालकर
मै झूलता था मगन होकर 
आज तुम्हारे दिल की ख्वाइश
पूरी करता हिचकिचा कर
तात ये  पदक सोने क़ा  मै 
कर रहा हूँ तुमको अर्पण 










18 टिप्‍पणियां:

ashish ने कहा…

बधाई आपको ( देर से ही सही ) आपके स्वर्ण पदक के लिए और आपके ताऊ जी के व्यकतित्व को नमन . सुन्दर काव्य अभिव्यक्ति .

अनूप शुक्ल ने कहा…

बहुत सुन्दर! आत्मीय संस्मरण। कामना है कि दादा जी और कई स्वर्णपदक आपके गले में पड़ते देखें।

अमित शर्मा ने कहा…

बधाई आपको !...............लेकिन इस स्वर्ण-पदक के लिए नहीं, वरन ऐसे पितृ पुरुष का सानिध्य प्राप्त होने के लिए. जिन्होंने अपने सुघड़ सपनो के द्वारा आप जैसा स्वर्णाभ व्यक्तित्व निर्मित किया, उनकी स्वर्णिम छांव में तो ऐसे ना जाने कितने ही स्वर्ण पदकों की चमक निस्तेज हो जाती है . पुनः बधाई सहित कोटिश नमन उन महान-निर्मल विभूति को !

आलोकिता ने कहा…

gr8, Bahut acha laga padh kar.

ZEAL ने कहा…

आपको बधाई एवं ताऊ जी को नमन ।

"पलाश" ने कहा…

आप सौभाग्य शाली है , कि आपके साथ हमेशा आपको प्रेरणा देने वले ताऊ जी है , आप अपने बडो और गुरुजनों के सपने यूँ ही साकार करते रहे , ।
हमारी शुभकामनाये सदैव आपके साथ है

कविता रावत ने कहा…

कभी पिता का अनुशासन
कभी माँ क़ा दुलार बने
इतने विस्तृत थे कि जिसमे
मेरा सारा संसार बने
तुम्हारे गले में बाहे डालकर
मै झूलता था मगन होकर
आज तुम्हारे दिल की ख्वाइश
पूरी करता हिचकिचा कर
तात ये सोने का पदक मै
कर रहा हूँ तुमको अर्पण
.....
बड़ों का आशीर्वाद और प्रेरणा जिनके साथ होती है उनके सपने साकार होते देर नहीं लगती...सच में जीवन में सपनो को साकार होते देखना कितना सुखद अनुभव होता है! ताऊ जी की आँखों में आपके लिए सदैव आह्लाद का भाव बना रहे और आप यूँ ही तरक्की की राह पर निरंतर अग्रसर बने रहें यही हार्दिक शुभकामना हैं

DEVESHWAR AGGRAWAL ने कहा…

many many thanks to you sir .

-------------------DEVESHWAR AGGRAWAL

chandra ने कहा…

दादा जी को मेरा प्रणाम कहियेगा क्युकी उन्ही की वजह से आप जैसी शख्सियत का वजूद है.
गोल्ड मेडल गोल्ड को ही मिलता है

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

बहुत सुन्दर और हृदयस्पर्शी पोस्ट!

आशीष मिश्रा ने कहा…

बहोत बहोत बधाई हो आपको ......

वीना ने कहा…

बहुत अच्छा लिखा है साथ ही ताऊ जी को प्रणाम

Abhinav Chaurey ने कहा…

बहुत उत्तम पोस्ट। पिता सदैव अपने पुत्र की सफलता में प्रसन्न होते हैं। पिता के प्रति प्रेम एवं आभार प्रगट करने वाले लेख कम ही पढ़ने को मिलते हैं।

sandhya ने कहा…

Bahut achchhi post...
Mata-pita ke prati itna prem aur anurag....
Dhanya hai aapke parents..........
Dhanyawad itni komal bhavuk rachna ke liye..

Akshita (Pakhi) ने कहा…

आपने तो पिता जी के लिए बहुत अच्छा लिखा. आप भी जौनपुर और कानपुर के हैं, जानकर अच्छा लगा.
'पाखी की दुनिया' में भी आपका स्वागत है.

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

अरे वाह पवन भाई, यह गोल्‍ड मेडल मुबारक हो। हमारी दुआ है कि आगे भी आप जीवन में इसी प्रकार स्‍वर्णिम कामयाबी प्राप्‍त करते रहें।

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अंधविश्‍वासी तथा मूर्ख में फर्क।
मासिक धर्म : एक कुदरती प्रक्रिया।

arganikbhagyoday ने कहा…

बहुत सुन्दर!

Neel Shukla ने कहा…

Great achievement in life....
Go ahead Dr. Sahab for best dream n vision..........

God may be dreamed u.....