रविवार, 12 दिसंबर 2010

और अफज़लो की सजा बदल रही है.











महबूब-ए-मुल्क की हवा बदल रही है,
ताजीरात-ए-हिंद की दफा बदल रही है.

अस्मत लुटी अवाम की कहकहो के साथ,
और अफज़लो की सजा बदल रही है.

बारूदी बू आ रही है नर्म हवाओ में,
कोयल की भी मीठी ज़बा बदल रही है.

सुबह की हवाखोरी भी हुई मुश्किल,
जलते हुए टायर से सबा बदल रही है.

सियासत ने हर पाक को नापाक कर दिया,
पंडित की पूजा मुल्ला की अजां बदल रही है.

कहने को वह दिल हमी से लगाए है,
मगर मुहब्बत की वजा बदल रही है.

दुआ करो चमन की हिफाजत के वास्ते,
बागबानो की अब रजा बदल रही है।

निगहबानी करना बच्चो की ऐ खुदा,
दहशत में मेरे शहर की फ़ज़ा बदल रही है.

16 टिप्‍पणियां:

ashish ने कहा…

सियासत ने हर पाक को नापाक कर दिया,
पंडित की पूजा मुल्ला की अजां बदल रही है.

सटीक बात लिखी है , सियासत ने हर इन्सान को दुसरे इन्सान पर शक करने वाला बना दिया है

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बारूदी बू आ रही है नर्म हवाओ में,
कोयल की भी मीठी ज़बा बदल रही है.

सियासत ने हर पाक को नापाक कर दिया,
पंडित की पूजा मुल्ला की अजां बदल रही है.

बहुत सार्थक बात कही है ..खूबसूरत गज़ल

smshindi ने कहा…

Very Nice

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत खूबसूरत गज़ल ...

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना कल मंगलवार 14 -12 -2010
को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..


http://charchamanch.uchcharan.com/

बेनामी ने कहा…

अस्मत लुटी अवाम की कहकहो के साथ,
और अफज़लो की सजा बदल रही है.

bahut khoob likha hai manjar aaj ke mahool ka.
de diya paigam sudhar jao aeeeeee nadan.

DEVESHWAR AGGRAWAL

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

धन्यवाद संगीता 'गीत' जी
चर्चामंच पर मेरी रचना प्रस्तुत करने के लिए --

दिगम्बर नासवा ने कहा…

अस्मत लुटी अवाम की कहकहो के साथ,
और अफज़लो की सजा बदल रही है....

बहुत खूब डाक्टर पवन ... आक्रोश भरी इस ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई ...
ये देश बदनसीब है जिसको ऐसे नेता मिले हैं ..

chandra ने कहा…

अस्मत लुटी अवाम की कहकहो के साथ,
और अफज़लो की सजा बदल रही है.
kassab ki bhi saza badal rahee hai bhaiya

"पलाश" ने कहा…

its nice to see you at kavita kosh . i am really happy for this . congratulations bhaai .

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

जरा इसे हिन्दी में लिखते तो अच्छा लागत भाई

Kailash C Sharma ने कहा…

सियासत ने हर पाक को नापाक कर दिया,
पंडित की पूजा मुल्ला की अजां बदल रही है.

बहुत सटीक समसामयिक प्रस्तुति..

"पलाश" ने कहा…

आपकी शिकायत जायज है । लेकिन हिन्दी लिखने मै कुछ समस्या आ रही थी । और मेरा तुरंत लिखने का मन था ।
आपको कविता कोष मे देखना बहुत अच्छा लगा । और आशा करती हूँ आपके सभी पाठ्को के लिये भी सुखद होगा ।
बहुत बहुत शुभकामनाये ।

आलोकिता ने कहा…

मस्त है ..... क्या लिखते हो आप
बहुत ही अच्छा | वैसे मैं हर जगह रोमन में
ही लिखती हूँ ऊपर आपकी टिप्पणी देख कर
हिंदी लिख रही हूँ | इससे पहले एक टिप्पणी
रोमन में लिख चुकी हूँ आपके ब्लॉग पर माफ़
कर दीजियेगा सर |
आलोकिता

arganikbhagyoday ने कहा…

बहुत सुन्दर!

Neel Shukla ने कहा…

Bahut Khoob sahab........