गुरुवार, 9 दिसंबर 2010

भूली बिसरी सुधियों के संग एक कहानी हो जाये














भूली बिसरी सुधियों के संग एक कहानी हो जाये,
तुम आ जाओ पास में मेरे  तो रुत रूमानी हो जाये।

मन अकुलाने लगता है चंदा की तरुनाई से,
रजनीगंधा बन जाओ तो रात सुहानी हो जाये।

रेशम होती हुई हवाए तन से लिपटी जाती है,
पुरवाई में बस जाओ तो प्रीत सयानी हो जाये।

मन बधने सा लगता है अभिलाषाओ के आँचल में,
प्रिय तुम प्रहरी बन जाओ थोड़ी मनमानी हो जाये।

13 टिप्‍पणियां:

ashish ने कहा…

मन अकुलाने लगता है चंदा की तरुनाई से,
रजनीगंधा बन जाओ तो रात सुहानी हो जाये।
"दम भर जो उधर मुह फेरे वो चंदा , मै उनसे प्यार कर लूँगा " ये ठीक है ना? मस्त लिखा है .

meri awaaj ने कहा…

हे पछुआ पवन तुम्हे सुरति पूरब की आई

यादों को तजा करने की देता तुम्हे बधाई

थी लगती कभी मुझे थी पूरब की हवाए प्यारी

पर इस पश्चिम की धुन ने सूखी कर दी फुलवारी

आ लौट चले फिर पूरब ,पश्चिम की चौंध छुड़ा ली

ऋषि मुनियों की धरती की सींचे फिर फुलवारी

माधव( Madhav) ने कहा…

sundar

chandra ने कहा…

अरे वाह
मन फिर अनुरागी हो गया
धन्यवाद भैया
अगर आप कि ये पोस्ट न आती तो मै सन्यासी बन जाता

Harshkant tripathi"Pawan" ने कहा…

मन बधने सा लगता है अभिलाषाओ के आँचल में,
प्रिय तुम प्रहरी बन जाओ थोड़ी मनमानी हो जाये।
very nice.........

Kailash C Sharma ने कहा…

मन अकुलाने लगता है चंदा की तरुनाई से,
रजनीगंधा बन जाओ तो रात सुहानी हो जाये।


बहुत सुन्दर भावपूर्ण प्रेम गीत...

abhishek1502 ने कहा…

very nice poem

अमित शर्मा ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
अमित शर्मा ने कहा…

@ प्रिय तुम प्रहरी बन जाओ थोड़ी मनमानी हो जाये।
अद्भुत है यह पूरी रचना ही
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ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

पवन जी, इस रूमानी गजल को पढकर मजा आ गया। शुक्रिया।

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त्रिया चरित्र : मीनू खरे
संगीत ने तोड़ दी भाषा की ज़ंजीरें।

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

भूली बिसरी सुधियों के संग एक कहानी हो जाये,
तुम आ जाओ पास में मेरे तो रुत रूमानी हो जाये।

क्या बात है ....!!

अब तो बुलाना ही पड़ेगा ......

Krishna Kant Tripathi ने कहा…

Hi, Really Amazing!!!!

arganikbhagyoday ने कहा…

बहुत सुन्दर!