शनिवार, 4 दिसंबर 2010

'कौवे' ने फिर काँव काँव किया बड़े दिनों के बाद.

अरे!

'कौवे' ने फिर काँव काँव किया  बड़े दिनों के बाद
कोयल के घोंसले को अपना बताना कौवों का जगजात फितूर है.
जनाब जमाल साहब मै ये नहीं चाहता था पर ना लिखना मुनासिब ना समझा.
आप कैसे विद्वान है जो सवाल को बदगुमानियत का दर्ज़ा देते है.
एक किस्सा सुनाये आपको..
चिडयाघर में एक चुटकुले पर दो घोड़े हस रहे थे गधा चुप था चौथे या पाचवे दिन गधा एकाएक हसने लगा तो पहले घोड़े ने दूसरे से पूछा कि आज बिना बात के यह गधा क्यों हस रहा है तो गधे ने खुद जवाब पोस्ट किया कि मुझे चुटकुला आज जा कर समझ में आया.
इतने दिन बाद अपर्णा जी  के कम्मेंट पर पोस्ट लिखने का सबब क्या है?
मुझे मालूम है कि अभी पूरा गिरोह चाव चाव करेगा एक नहीं दस दस कमेन्ट मुझ पर किये जायेगे
जमाल साहब 'अजीत' के अंदाज में मुह में राम बगल में छुरी रखकर प्यारी बाते कहेगे.
.....और भास्कर जी क्या कहे आपको आप भी इरादा नहीं समझ पाते.
जनाब जमाल अब आप अपने इरादे जरा स्पष्ट शब्दों में बता दे.
हां या नहीं में जवाब दे (केवल हा या नहीं )
१. सम्पूर्ण भारत इसलाम का अनुयायी बन जाय
२. आपने एक बार टिप्पणी की थी कि ओबामा की दादी को सम्पूर्ण विश्व के लिए यही दुआ मांगनी चाहिए.(शायद तौसीफ जी की पोस्ट थी जिसमे ओबामा की दादी चाहती थी की ओबामा इसलाम कबूल करले). आपकी दिली इच्छा पूरे विश्व को इसलाममय देखने की है.
३. ईश्वर ही अल्लाह का पर्याय है.
एक बात मै आपको स्पष्ट कर दू और आपके पूरे गिरोह को कि 'अल्लोप्निषद' या 'भविष्यपुराण' अकबर के समय में रचे गए है. ये 'ओरिएन्तेद' रचनाये है जिनका प्रयोग आप जैसे विद्वान ही कर सकते है.
सुधी पाठक गण नीचे लिंक को पढ़कर जमाल जी के विचार देखे और अपर्णा जी के कमेंट्स फिर उसमे क्या बद्गुमानियत है बताये.

http://vedquran.blogspot.com/2010/03/blog-post.html
Monday, March 1, 2010 कौन कहता है कि ईश्‍वर अल्लाह एक हैं

आम तौर पर लोग यह समझते हैं कि गांधी जी ने बताया है ‘‘ ईश्‍वर अल्लाह तेरो नाम सबको सन्मति दे भगवान ‘‘ या फिर लोग कहते हैं कि साईं बाबा ने कहा है कि
सबका मालिक एक
और अल्लाह मालिक
लेकिन हकीक़त कुछ और है...हकीकत क्या है? बताओगे ?
वैदिक साहित्य तो इसका उद्घोश तब से कर रहे हैं जब मुसलमान भारत में आये भी नहीं थे ।

अल्लोपनिषद इसी महान सत्य का उद्घोश है ।भारत की हिन्दू मुस्लिम समस्या के खात्मे के लिए भी यह अकेला उपनिषद काफ़ी है और भारत को विश्‍व गुरू बनाने के लिए भी ।
अल्लो ज्येष्‍ठं श्रेष्‍ठं परमं पूर्ण ब्रहमाणं अल्लाम् ।। 2 ।।
अल्लो रसूल महामद रकबरस्य अल्लो अल्लाम् ।। 3 ।।
अर्थात ’’ अल्लाह सबसे बड़ा , सबसे बेहतर , सबसे ज़्यादा पूर्ण और सबसे ज़्यादा पवित्र है । मुहम्मद अल्लाह के श्रेष्‍ठतर रसूल हैं । अल्लाह आदि अन्त और सारे संसार का पालनहार है । (अल्लोपनिषद 2,3)
इस पर अपर्णा जी की टिप्पणी  है......
'आप जिस उपनिषद की बात कर रहे है , कृपया उसके रचयिता का नम भी बता दीजिये ।
और रही बात ईशवर और अल्लाह के अलग होने की , तो हो सकता है आप ने दोनो को साक्षात अलग अलग देखा हो , और यह आपका परम सौभाग्य रहा होगा ।
हो सकता है । आपका प्रयास सफल हो हम तो यही दुआ करते है । आप अपने जीवन में अपने धर्म को श्रेष्ठ बताने में सफल हो जायें क्योकिं हमे तो इसकी तनिक भी जरूरत नही। हम सूरज को आइना नही दिखाते । क्या नवीन है और क्या पुरातन शायद यह जानने के लिये आपको अभी और अध्धययन की आवश्यकता है ।'

यहाँ मै अपने सुधी पाठकों को एक बात और बताना चाहूँगा कि मैने बृहस्पतिवार, ११ नवम्बर २०१० को जमाल साहब को एक पत्र लिखा था एक पत्र-पुष्प अनवर जमाल के नाम 

आज तक जमाल साहब तक शायद यह पत्र पहुँचा ही नही या वह अभी जवाब लिख ही रहे है ? जो भी हो अभी तक हमारा इंतजार जारी है

40 टिप्‍पणियां:

Arvind Mishra ने कहा…

एक जगह और भी कौआ पंख खुजा रहा है ....मैं भी जौनपुरी हूँ भाई !

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

अरविन्द भैया अगर आप उस कौवे का पता बताते तो हम उसे जालिम लोशन गिफ्ट कर देते. मिलकर खुशी हुई आपसे.

अपर्णा "पलाश" ने कहा…

' कौन कहता है ईश्वर अल्लाह एक है'
विद्वान भाई जमालजी मुझे इस शीर्षक का स्पष्टीकरण चाहिए. अन्यथा मै समझूगी कि आपकी विद्वता महज़ ब्लॉग को चर्चा लाने के लिए है
कितने अर्थ है जमाल जी बताने का कष्ट करे
१ लेख में यह पूछा गया की किसने कहा... अंत में पढने को मिला की गांधीजी ने कहा
. इन पंक्तियों का भावार्थ बताइए.
२. लेख में अल्लाह की ज्येष्ठता इश्वर पर सिध्ध की गयी है. ये भाषाई अज्ञानता है या विद्वत्ता या कुछ और क्या है? सविस्तार बताइये.
३. अल्लोप्निषद के बारे में पूछना बद्गुमानियत है?

बेनामी ने कहा…

kauve ko khoob saf karo lekin wah baithega.......wahe par. aaplog nahak pareshaan ho rahe haipawan ji aapkee kawitaaye mashaallah
keep it
....r.c.chauhaan

KK Yadava ने कहा…

पहली बार आपके ब्लॉग पर आया हूँ...सुन्दर प्रयास...बधाई !!

chandra ने कहा…

अरे मिसिर भाय-----
इन कौवों के चक्कर में फिर पड़ गए. कहा रामकथा कहा कुकुरकाट. इतने दिन आपकी कविताओं को पीता रहा जीता रहा अब फिर वही दिन वही रात. इन गधो को क्यों घोड़े बनाने पर तुले हो. आप मास्टर हो हर किसी को शुक्ष देना चाहते हो लेकिन सनद रहे कुपात्र को समझाना ऊसर में बीज बोने जैसा है.
बाकी आपकी मर्जी

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

चन्द्र भैया मै खुद नहीं चाहता हूँ किन्तु 'स्वधर्मे निधनं श्रेय'. स्वधर्म पर आक्षेप स्वीकार नहीं. अपर्णा का रक्षासूत्र मेरी कलाई पर है उसको कैसे जाया होने दू. असत्य और फसाद का खात्मा मै रसूल साहब से सीखा है. इन पथभ्रमित लोगो को और कष्ट ना मिले इसलिए इन्हें समझाता हूँ. आखिर मेरे ही देशबंधु है.

अपर्णा "पलाश" ने कहा…

भैया एक दिन हमने ही आपसे कहा था कि इन लोगों को कहने दो जो कहते है , हम लोगों को वो लिखना चाहिये जिससे लोगों को अपनापन लगे । जिसे पढ्कर लोग खुश हों , मै हमेशा ऐसा लिखने और पढ्ने से दूर रहना चाहती हूँ जिसमें द्वेश कपट और बुराई के अलावा कुछ ना हो । गाय यूँ तो बहुत सीधी प्राणी है किन्तु वह भी नाहक प्रहार बर्दाश्त नही करती और शायद इसीलिये ईश्वर ने उसे सीघें भी दी । फिर मनुष्य होने के नाते मेरा यह फर्ज ही नही धर्म भी है कि अन्याय से मुख ना मोडू , और इसी लिये जमाल साहब से कुछ अनुत्तरित प्रश्नों का जवाब चाह रही थी । किन्तु शायद सही जवाब के अभाव में उन्होने मुझ पर निराधार आरोप लगा दिये जिनका भास्कर जी ने समर्थन भी किया , भास्कर जी आपसे विनम्र निवेदन है कि यदि आपके पास मेरे प्रश्नो के उत्तर है तो आप ही दे दीजिये । किसी के साथ खडे होना अच्छा है किन्तु सही के साथ होना उससे ज्यादा अच्छा माना जाता है ।
भैया जी का इस विषय में दुबारा लिखना मेरे लिये बहुत गर्व की अनुभूति देता है ।

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

सर्व भूतों को आत्मवत देखने वाले आप सभी बहन भाइयों को प्रणाम !
1. क्या विद्वानों ने बोलने से ख़ूब अच्छी तरह सोचने के लिए नहीं कहा है ?
2. बहन अपर्णा जी ने कमेँट मेरी एक पुरानी पोस्ट किया था जिन्हें मैं कम देख पाता हूँ ।
3. मैं कोशिश करता हूँ कि शेड्यूल को फ़ोलो किया जाय । दूसरे कुछ और लोगों के सवालात जवाब के मुंतज़िर थे ।
4. बहन अपर्णा ने भी जवाब के लिए कोई समय सीमा मुक़र्रर नहीं की थी .
5. आप भाई भी कह रहे हैं और कौआ भी ?
फ़िलहाल रास्ते में हूँ , इससे ज़्यादा कलाम से माज़ूर हूँ .
उम्मीद है कि हालात को समझेंगे .
सत्यमार्गियों उपहास , अपमान और मौत को सहना ही पड़ता है, पहले भी ऐसा ही हुआ और बार बार ऐसा ही होगा .
आपसे कोई शिकायत नहीं है ।
बात हमारी और आपकी चलती ही रहेगी .
सादर
वंदे ईश्वरम .

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

जनाब जमाल जी क्या खूब कही काम से काम ऊपर दिए गए प्रश्नों के जवाब तो दे दिए होते तो मै समझता कि आप ईमान वाले है बतिया के कहे घुमाय रहे हो तथाकथित सत्पथी महोदय . तनी सोझ सोझ बताव ना.
सबका मालिक एक है

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

कमाल है आप जैसा विद्वान और कर्मठ बंदा ऐसी बात करे कि टिप्पणिया देखने का समय नहीं मिलता सरासर झूठ बोल रहे है जनाब. ईश्वर अल्लाह के बाद तमाम पोस्टे आपने निकाली है फिर भी कह रहे है कि टिप्पणी देखा नहीं. वह रे सत्पथी. एक रास्ता बताऊ यदि आपके पास टाइम ना हो तो भास्कर जी को इस काम में लगा दीजिये वो बड़े मनोयोग से इसको अंजाम देगे.
आभार आपका जो मेरे कूचे आये
ऐसे आते रहे तो वाकई में सत्पथी कहलायेगे.

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ ,सार्थक लगा !
-ज्ञानचंद मर्मज्ञ

Tarkeshwar Giri ने कहा…

भैया जौनपुरी, नाहक उत्तर की उम्मीद लगाये बैठे हैं, हमारे अनवर भाई सिर्फ सवाल दागते है, उत्तर देना इनके शब्दकोष मैं कंहा.

अउर भईया अनवर जमाल, हम तो आप से पाहिले से ही कह रहे थे की नाहक वेद-पुराण पे बहस करते हैं आप . पाहिले कुरान की सही शिक्षा तो आप अपने समाज को दे देते.

एक विनती है अउर है अनवर भाई आपसे की, भारत को इस्लाम मय मत बनाइएगा, नहीं शिया -सुन्नी का बवाल हिंदुस्तान मैं भी शुरू हो जायेगा.

अपर्णा "पलाश" ने कहा…

गिरी जी आपका बहुत बह्त धन्यवाद सही कहा आपने
हमारे उत्तर तो शायद ही जमाल साहब दें , काश वो आपकी बात मान लें ।

महफूज़ अली ने कहा…

बहुत दिनों के बाद और आपके ब्लॉग पर पहली बार आकर बहुत अच्छा लगा...

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

शुक्रिया अली साहब ।

एस.एम.मासूम ने कहा…

हिंयां तो भैया बड़ी अजब गजब बतिया चलत है. कौनो सवाल करे हैं, कौनो और जवाब देये है, कौनो टंगिया खीचत है, कौनो को खुजली भई है. अरे तर्केश्वेर जी का जौनपुर गए बहुत दिन हो गए का ? अरे चले जाओ भैया, नया आलू और मटर का मौसम है, सेहत बना लो. कहीं कौनो मुरिया दिखे तो लाए लिहो.

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

@ भाई तारकेश्वर जी ! आप भी अजीब प्राणी हैं ।

अपने भाई पवन मिश्रा जी पहले मुझे गधा कह चुके हैं , आज कौआ कह रहे हैं और फिर मुझे अपना भाई भी बता रहे हैं ।
अरविंद मिश्रा जी जैसी नामचीन हस्ती आई , लेकिन इस बदतमीज़ी से रोकने के बजाय और तसदीक़ करके चले गए ।
फिर कुछ और लोग आए उन्होंने भी यही किया । उन्हें मैं जानता नहीं इसलिए उनकी कोई शिकायत भी नहीं ।
आप आए आपने भी नहीं टोका ।
मैंने अपनी खोज में जो सत्य पाया , सबके सामने रख दिया । अब जिसका दिल चाहे मान ले और जो न मानना चाहे न माने ।

इन्हें मेरी किसी बात पर ऐतराज़ है तो उसकी तार्किक आलोचना करें । मैं इनकी बात मानना चाहूंगा तो मान लूंगा और नहीं मानना चाहूंगा तो नहीं मानूंगा ।

मैंने पवन मिश्रा जी को आज तक कभी कुत्ता , गधा या कौआ नहीं कहा है तो ये भाई साहब मुझे यह सब क्यों कह रहे हैं ?
मैंने तो इनके जवाब में भी पलटकर कुत्ता गधा या कौआ नहीं कहा है ?
जिन लोगों को बात करने तक की सभ्यता न हो मैं उनकी किस बात का जवाब उन्हेँ दूं ?
उनकी गालियों के बदले मेँ , मैं उन्हें गालियां नहीं देना चाहता । इससे न उनका कोई भला होगा और न ही मेरा । गाली का जवाब गाली से दूंगा तो दिल और माहौल दोनों ही ख़राब होंगे ।
डाक्टर साहब हमें गालियां देकर ख़ुश हैं तो हम उनकी ख़ुशी में ख़ुश हैं । उम्र में भी हम उनसे बड़े ही हैं ।
मुझे अब भी उनसे कोई शिकायत नहीं है ।
लेकिन गिरी भाई आपसे ज़रूर है ।
आप कह रहे हैं कि मैं केवल सवाल दाग़ता हूँ लेकिन सवालों के जवाब नहीं देता । मैंने 200 से ज्यादा लेख लिखकर लोगों के सवालों के जवाब दिए हैं , अगर टिप्पणी करने से पहले आपने लेख पढ़ने की आदत भी डाली होती तो आज आप ऐसी बेबुनियाद बात न कहते ।
डाक्टर पवन साहब ने भी अगर मेरे आधे लेख भी पढ़े होते तो उनके ज्यादातर सवाल हल हो चुके होते ।
एक दिन लोग इस सच को जरूर मानेंगे ।

एस.एम.मासूम ने कहा…

अरे अनवर साहब कहे की शिकायत कौवा कहा तो कहा , आप को अपना भाई भी तो कहा ना. फिर कैसी शिकायत?

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

@ जनाब मासूम साहब ! भाई डा. पवन कुमार मिश्रा जी और बहन अपर्णा से कोई शिकायत नहीं है ।
शिकायत मैंने गिरी जी से की है ।
किस बात की ?
इस बात की कि
उनके हरेक सवाल का जवाब मैंने दिया है लेकिन वह हैं कि पढ़ते तक नहीं ।

उन्हें बताना चाहिए कि उनका कौन सा सवाल अनुत्तरित है ?

Tarkeshwar Giri ने कहा…

समस्या तो ये ही हैं श्रीमान अनवर जमाल जी, कि आप विषय से बहुत जल्द किनारा कस लेते हैं, आप डॉ पवन मिश्रा का जबाब तो दीजिये.

अउर मासूम साहेब का करें ससुरा पूरा एक साल होई चूका हैं जौनपुर गये. अब तो हरी- हरी मटर कि यद् भी आने लगी हैं ससुरी, ऊऊ का कहते हैं, निमोना खाए हुए... हैं रे स्वाद......

"पलाश" ने कहा…

पवन जी ने इस ब्लाग में किसी को भी कोई गाली नही दी , उन्होने सिर्फ व्यंग विधा में अपना लेख लिखा है , जिसे जमाल जी कुछ और ही समझ कर अपनी नाराजगी दर्ज करा रहे है
जमाल जी आपने अभी तक तो हमारे और डा. पवन जी के किसी भी सवाल का तार्किक उत्तर नही दिया है । आप बहुत सारी बात कह गये, थोडा समय लिकाल कर हमारे सवालो के स्पष्ट जवाब लिख दे तो बेहतर रहे

"पलाश" ने कहा…

मासूम साहब डा. मिश्र जी ने कही भी ना तो जमाल जी को अपशब्द कहे है और ना ही भाई कहा है , मुझे तो कम से कम ऐसा इस पोस्ट मे कही नही दिखा

एस.एम.मासूम ने कहा…

गदहे और कौवे की फोटू लगाए के इंसानन से बतिया करे का इ कौन सा नया तरीका इजाद भया? तर्केश्वेर जी निमूना खाए लो, पवन कुमार जी को भी खिलाओ, मिर्ची कम दालेओ ज़रा

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

प्रिय मासूम जी आप दो बाते कर रहे है. आप ने मेरा पोस्ट अच्छी तरह से नहीं पढ़ा बिना पढ़े ही कम्मेंट किये जा रहे है. (जनाब जमाल भी ऐसी गलती कर चुके है ) भास्कर जी भी ऐसी चूक कर गए थे. आज इंसानों पर बैताल भी शर्मिंदा हो जाय. इंसानियत की सभी अपनी अपनी ढफली बजाना शुरू कर दिएही
आपसे करबध्ध निवेदन है कि आप अपने इरादे तय कर लीजिये.
आप एक तरफ जौनपुर का उल्लेल्ख कर रहे है वही दूसरी तरफ जमाल साहब की जबरदस्ती का भी अनुमोदन
आप तय करिए फिर बताइये ............
प्रतीक्षा में ......

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

प्रिय सुहृदय मासूम
आपका मेल पढ़ा देर. आये मगर दुरुस्त. आपका अनुरोध सर माथे पर

जन्मभूमि शिराज ए हिंद जौनपुर
कर्भूमि मानचेस्टर कानपुर
आप मुझे पहले भी प्रिय लगे
आप जौनपुर में कहा के रहने वाले है?
मात्रभूमि का नाता था मुझे नहीं मालूम था
किन्तु एक रंज है
पहले क्यू नहीं बताया
मैंने आपसे सेवई की मांग की थी
आप जमाल साहब को खिलाते समय मुझे क्यू भूले
मेरा सन्देश प्यार का है
आह्लाद का है
मासूमियत का है भोलापन का है
उदार चरितानाम वसुधैव कुटुम्बकम

सादर आपका हमेशा
...................पवन

किलर झपाटा ने कहा…

कर्कश पोस्ट

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

झपाटा जी कर्कशता को कौवों से जोड़कर बता रहे है तो थोडा लेखनी और चला दिए होते महाराज. आजकल सूक्तिय लोगो को काम समझ में आती है.

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

@ प्यारी बहन पलाश जी ! जवाब तो आपका कब से मुंतज़िर है मेरे ब्लाग पर,
लेकिन आप आएं तो सही ।

उसका एक अंश मैं आप सभी बहन भाईयों की सेवा में यहीं अर्पित किए देता हूँ-

ईश्वर एक है तो धर्म भी दो नहीं हैं और न ही सनातन धर्म और इस्लाम में कोई विरोधाभास ही पाया जाता है । जब इनके मौलिक सिद्धांत पर हम नज़र डालते हैं तो यह बात असंदिग्ध रूप से प्रमाणित हो जाती है ।
ईश्वर को अजन्मा अविनाशी और कर्मानुसार आत्मा को फल देने वाला माना गया है । मृत्यु के बाद भी जीव का अस्तित्व माना गया है और यह भी माना गया है कि मनुष्य पुरूषार्थ के बिना कल्याण नहीं पा सकता और पुरूषार्थ है ईश्वर द्वारा दिए गए ज्ञान के अनुसार भक्ति और कर्म को संपन्न करना जो ऐसा न करे वह पुरूषार्थी नहीं बल्कि अपनी वासनापूर्ति की ख़ातिर भागदौड़ करने वाला एक कुकर्मी और पापी है जो ईश्वर और मानवता का अपराधी है, दण्डनीय है ।
यही मान्यता है सनातन धर्म की और बिल्कुल यही है इस्लाम की ।

अल्लामा इक़बाल जैसे ब्राह्मण ने इस हक़ीक़त का इज़्हार करते हुए कहा है कि

अमल से बनती है जन्नत भी जहन्नम भी
ये ख़ाकी अपनी फ़ितरत में न नूरी है न नारी है

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

जनाब जमाल साहब
आप बार बार गाली शब्द का उपयोग कर रहे है
मैंने आज तक कभी किसी को गाली नहीं दी है
है ना विश्व का आठवा आश्चर्य
लगता है बी. एन. शर्मा का भूत आपको कस कर पकड़ लिए है तभी आप को हर बात गाली नज़र आती है.
आप कितने ही चाल चले लेकिन आप कभी मेरे दिए सवालों का जवाब नहीं देते.
मैंने पहले भी कहा था आपमें ईमान नहीं है नहीं तो मात्र तीन शब्दों में मेरा जवाब मिल जाता.
लोगो को गुमराह करना बंद कीजिये.
तौबा कीजिये
अल्लाह परम दयालु एवं क्षमाशील है.
सौ सुनार के एक लुहार की
तीन शब्दों में जवाब चाहिए
इल्म से है कद्र इंसान की
है इंसान वही जो जाहिल नहीं.
देखते है कि आप क्या चुनना पसंद करते है.

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

आदरणीय गिरी जी, अरविन्द भैया, मेरे भोले मासूम जी महफूज़ भाई , मर्मग्य जी, यादव जी, किलर जी बेनामी बंधू और सभी जिन्होंने सत्य का साथ दिया उनसब का मै आभार व्यक्त करता हूँ. बहन अपर्णा तो साथ में हैही.

'मेरी हिम्मत को सार्हो मेरे हमराह बनो
मैंने इक शम्मा जलाई है झंझावातो के खिलाफ'

धन्यवाद

chandra ने कहा…

kauwa to ud gaya
kauwe kitne hee chaal badal le hans nahee ho sakta
are kauwe jawaab de na......
acvhchee tarh se ud gaye hai shayad
kale kaga aa
ha ha ha

"पलाश" ने कहा…

भाई को धन्यवाद कहना गलत होगा , इसलिये धन्यवाद कहूँगी भी नही ।
लकिन आपने हमेशा मेरा साथ दिया है और हमारे विश्वास का हमेशा मान बढाया है , मुझे जब भी आपकी जरूरत पडी आप हमेशा मेरे साथ मेरे बुलाने से पहले रहे हैं । बस ईश्वर से यही प्रार्थना है कि आप जैसा भाई सभी को मिले ।
आपसे मुझे बहतु कुछ सीखने को मिला , कई बार हौसला भी मिला ,

उम्र में छोटे होकर भी
तुम सदा ही मेरी ढाल बने
जब जब बिखरा साहस मेरा
तुम मेरा विश्वास बने

और् हमेशा सीखती भी रहूँगी ........

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

आदरणीय डा. पवन कुमार मिश्रा जी ! मैंने आपकी सेवा मेँ एक अंश पेश किया था -
अब जरूरत है सच का सामना करने की , उसे मानने की
सनातन है इस्लाम , एक परिभाषा एक है सिद्धांत
ईश्वर एक है तो धर्म भी दो नहीं हैं और न ही सनातन धर्म और इस्लाम में कोई विरोधाभास ही पाया जाता है । जब इनके मौलिक सिद्धांत पर हम नज़र डालते हैं तो यह बात असंदिग्ध रूप से प्रमाणित हो जाती है ।
ईश्वर को अजन्मा अविनाशी और कर्मानुसार आत्मा को फल देने वाला माना गया है । मृत्यु के बाद भी जीव का अस्तित्व माना गया है और यह भी माना गया है कि मनुष्य पुरूषार्थ के बिना कल्याण नहीं पा सकता और पुरूषार्थ है ईश्वर द्वारा दिए गए ज्ञान के अनुसार भक्ति और कर्म को संपन्न करना जो ऐसा न करे वह पुरूषार्थी नहीं बल्कि अपनी वासनापूर्ति की ख़ातिर भागदौड़ करने वाला एक कुकर्मी और पापी है जो ईश्वर और मानवता का अपराधी है, दण्डनीय है ।
यही मान्यता है सनातन धर्म की और बिल्कुल यही है इस्लाम की ।

अल्लामा इक़बाल जैसे ब्राह्मण ने इस हक़ीक़त का इज़्हार करते हुए कहा है कि

अमल से बनती है जन्नत भी जहन्नम भी
ये ख़ाकी अपनी फ़ितरत में न नूरी है न नारी है

यह अंश जिस पोस्ट का है , वह अभी तक आप सभी सभ्य जनों समीक्षा और आलोचना की मुंतज़िर है ।
कम से कम आपको और हम दोनों की मुश्तरका बहन पलाश को तो हमें हताश नहीं करना चाहिए ।

स्वागत है आपका भी और आपके नजरिए का भी ।
आपकी असहमति को भी पूरा सम्मान दिया जाएगा ।
Welcome .

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

जमाल जी आप भी बड़े लेथनिया हो परपंच करने से सत्य नहीं विवाद उत्पन्न होता है. मेरे सवालों के जवाब तो दे दीजिये. कितनी बार कितने तरीके से घुमा फिर कर कहो लेकिन वही ढाक के तीन पात. 'द्वारका जाहू जू द्वारका जाहू जू आठहू जाम ये बैन तू रटत है'.

आपसे तीन अक्षर फूट नहीं रहे है बात करते हो समीक्षा की

मेरे तीन प्रश्नों का हा या ना में जवाब दो अगर ईमान वाले हो

आप जहा कहो जो कहो मै किसी भी मुद्दे पर स्वस्थ चर्चा के लिए तैयार हूँ

बसशर्त एक ही बात की है कि एक बात गधो की तरह बार बार रेकी ना जाय

दिगम्बर नासवा ने कहा…

भाई पूरी पोस्ट और फिर कमेन्ट ... सब कुछ गड़बड़ झाला ... लगता है कुछ छूट गया हम से ...

दीपक बाबा ने कहा…

पवन मिसिर जी, काहे इन कोओं के चक्कर में मन की शांति खत्म करते हो.....

ससुरा एक कोवा मरता हैं तो कितनों की कांव कांव शुरू हो जाती है और इंसानों के सर नोचने के लिए चोंच खोल उड़ते हैं.

ram ने कहा…

अंधेरा जो एक दीप से डरता है, अंधेरा भी दीप पर विश्वास करता है।
वह दीप ही तो है जो रोशनी में, अंधेरे का इन्तज़ार किया करता है॥

Ravindra Nath ने कहा…

पवन जी जमाल किसी भी सवाल का जवाब क्या देगा, हमारे ग्रन्थ संस्कृत मे हैं और वो तो ठीक से अरबी भी नही जानता, मैने खुद उसकी गलतियां पकडी हैं। वो तो कुछ हिन्दु उसके भ्रम जाल मे क्या फंस गए वो अपने को बहुत बड़ा ज्ञानी समझने लगा है पर सत्य मे उसे कुछ भी आता है मुझे इस पर शक है। आप और अपर्णा बहन अपना समय व्यर्थ न करें, आप लोग बहुत अच्छी रचनाएं करते हैं उस पर ही ध्यान दें, यहां तो सिर्फ कीचड़ है, ढेला मारेंगे तो खुद ही गंदे होंगे, अन्दर कुछ नही बदलेगा।

एस.एम.मासूम ने कहा…

कर्बला मैं ऐसा क्या हुआ था की इसकी याद सभी धर्म वाले मिल के मनाते हैं> क्या कहते हैं संसार के बुद्धीजीवी, दार्शनिक, लेखक और अधिनायक, कर्बला और इमाम हुसैन के बारे में इमाम हुसैन (ए .स ) के खुतबे