बुधवार, 1 दिसंबर 2010

किन्तु मुझको है भरोसा, आओगी तुम मुस्कराकर.











बीता रात का तीसरा पहर
तुम नहीं आये
आधा हुआ चंदा पिघलकर
तुम नहीं आये

मै अकेला हूँ यहाँ पर
यादो की चादर ओढ़कर
रात भर पीता रहा
ओस में चांदनी घोलकर

फूल खिले है ताजे या तुम
अपने होठ भिगोये हो
हवा हुयी है गीली सी क्यों
शायद तुम भी रोये हो

अब सही जाती नहीं प्रिय
एक पल की भी जुदाई
देखकर बैठा अकेला
मुझ पे हसती है जुन्हाई

बुलबुलें भी उड़ गयी है
रात सारी गीत गाकर
किन्तु मुझको है भरोसा
आओगी तुम मुस्कराकर.

किन्तु मुझको है भरोसा
आओगी तुम मुस्कराकर.

14 टिप्‍पणियां:

PURNIMA TRIPATHI ने कहा…

फूल खिले है ताजे या तुम
अपने होठ भिगोये हो
हवा हुयी है गीली सी क्यों
शायद तुम भी रोये हो
भाषा का लालित्य भावनाओं का ज्वार दोनों ही खुबसूरत हैं

अमित शर्मा ने कहा…

बुलबुलें भी उड़ गयी है
रात सारी गीत गाकर
किन्तु मुझको है भरोसा
आओगी तुम मुस्कराकर.

जरूर आएगी प्रोफ़ेसर साहब जरूर आएगी, आ भी गयी हो देखो तो ज़रा .........

chandra ने कहा…

फूल खिले है ताजे या तुम
अपने होठ भिगोये हो
हवा हुयी है गीली सी क्यों
शायद तुम भी रोये हो
wow what a romantic lines

ashish ने कहा…

मै अकेला हूँ यहाँ पर
यादो की चादर ओढ़कर
रात भर पीता रहा
ओस में चांदनी घोलकर

अच्छा लगा चांदनी को ओस में घोलकर पीने वाला बिम्ब . सुन्दर भाव प्रवण अभिव्यक्ति .

विजय तिवारी " किसलय " ने कहा…

पढ़ कर अच्छा लगा.
लिखते रहें.

हिंदी साहित्य संगम जबलपुर

Dr Kiran ने कहा…

अब सही जाती नहीं प्रिय
एक पल की भी जुदाई
देखकर बैठा अकेला
मुझ पे हसती है जुन्हाई

अब तो आप अकेले नहीं है
कविता लाजवाब है
आनंद आ गया

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

चाँद का पिघलना ...और चाँदनी को घोल कर पीना ...सुन्दर बिम्ब ... रुमानियत से भरी अच्छी रचना

अपर्णा "पलाश" ने कहा…

वो लोग दुनिया में बहुत भाग्यशाली होते है , जिनको कोई पुकारे, जिनका इंतजार करे, मगर उनसे भी ज्याद किस्मत वाला वो होता है जिसके इंतजार का सुखद अंत होता है

बडी शिद्दत से की थी पूजा हमने भी मगर
आज तलक हर ख्वाब सिर्फ ख्वाब रहा
सजदा किया जिनके दर पर रात दिन
उन्हे मेरा नाम तक ना याद रहा

ZEAL ने कहा…

.

दिल से किये गए इंतज़ार की बेहतरीन अभिव्यक्ति।

.

दीपक डुडेजा DEEPAK DUDEJA ने कहा…

मै अकेला हूँ यहाँ पर
यादो की चादर ओढ़कर
रात भर पीता रहा
ओस में चांदनी घोलकर


पवन जी, ये पंक्तिय ह्रदय को छु गई..... साधुवाद एक अच्छी कविता के लिएय.

प्रेम सरोवर ने कहा…

Bahut hi hridaysparshi post. PLz. visit my new post.

बेनामी ने कहा…

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ramji ने कहा…

किसी को याद कर चाँद मुस्करा गया

चांदनी में मुस्कान घोल जग में बिखरा गया

टपके जो चाँद से प्रेम ओस बनकर

पवन जी के शब्द झकोरों से ,आनंद आ गया

बेनामी ने कहा…

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