बुधवार, 1 दिसंबर 2010

बूँद आख़िरी ख़त्म हुयी होंठो पर प्यास रही बाकी





















बूँद आख़िरी ख़त्म हुयी होंठो पर प्यास रही बाकी,
बंद हुए सब मयखाने पीने की आस रही बाकी.

सैय्यादो की बस्ती में पंछी किससे फ़रियाद करे,
फरमान मौत का सुना दिया इलज़ाम लगाना है बाकी.

कालिख भरी कोठरी से बेदाग़ गुज़रना मुश्किल है,
अब तक कोरे दामन पर तोहमत का लगना है बाकी.

दावा है उनका पहुचेगे इक दिन चाँद सितारों तक,
लेकिन पहले वह तय करलो जो दिलो में दूरी है बाकी.

पूरब में उड़ाती हुयी घटाओ  इक दिन मेरे घर आना,
बीत गए सावन कितने पर मेरा आँगन है बाकी.

बूँद आख़िरी ख़त्म हुयी होंठो पर प्यास रही बाकी,
बंद हुए सब मयखाने पीने की आस रही बाकी.

13 टिप्‍पणियां:

अमित शर्मा ने कहा…

@ फरमान मौत का सुना दिया इलज़ाम लगाना है बाकी.

वाह भाईजी गजब !!!

वन्दना ने कहा…

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (2/12/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा।
http://charchamanch.blogspot.com

अपर्णा "पलाश" ने कहा…

चाहे जितने इल्जाम मिले ,पर रहे ना कभी खुशिया बाकी

भले ही काटें हाथ लगे फूलों की आस ना रहे बाकी

बाकी....... पढ कर बहुत अच्छा लगा , मजा आ गया

वाणी गीत ने कहा…

दावा है उनका पहुचेगे इक दिन चाँद सितारों तक,
लेकिन पहले वह तय करलो जो दिलो में दूरी है बाकी....
पूरे संसार से जुड़े हैं लोंग ...बस घर और पड़ोस की ही खबर नहीं ...

बूँद आख़िरी ख़त्म हुयी होंठो पर प्यास रही बाकी,
बंद हुए सब मयखाने पीने की आस रही बाकी....

जिंदगी का भी यही फलसफा है ...
उम्रे दराज़ मांग कर लाये थे चार दिन
दो आरजू में कट गए दो इंतज़ार में ...

आशीष मिश्रा ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति

chandra ने कहा…

कालिख भरी कोठरी से बेदाग़ गुज़रना मुश्किल है,
अब तक कोरे दामन पर तोहमत का लगना है बाकी
चन्दन विष व्यापत नहीं लिपटे रहत भुजंग

Dr Kiran ने कहा…

पूरब में उड़ाती हुयी घटाओ इक दिन मेरे घर आना,
बीत गए सावन कितने पर मेरा आँगन है बाकी.

घटाओ की तो नहीं जानती लेकिन आगन में तुलसी के साथ किरण भी है साहब

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

वंदना जी चर्चा मंच पर मेरी रचना प्रस्तुत करने का आपका शुक्रिया.
आभार

ALOKITA ने कहा…

bahut acha laga pawan ji aapki kawita ko padh kar

यशवन्त ने कहा…

मज़ा आ गया पढ़ कर

सादर

Kailash C Sharma ने कहा…

सैय्यादो की बस्ती में पंछी किससे फ़रियाद करे,
फरमान मौत का सुना दिया इलज़ाम लगाना है बाकी.

वाह!हरेक शेर लाजवाब..बहुत सुन्दर

dev ने कहा…

लेकिन पहले वह तय करलो जो दिलो में दूरी है बाकी.





पवन जी.... जह्नो मे दीवार ना हो तो, मिलना कोई दुश्वार नहीं है......

सुंदर और सत्य रचना के लिए बधाई.

बेनामी ने कहा…

maja aa gaya

deveshwar