शुक्रवार, 26 नवंबर 2010

इंसान की मुकम्मिल पहचान मेरे राम।



















मुल्क की उम्मीद-ओ -अरमान मेरे राम,
इंसान की मुकम्मिल पहचान मेरे राम।

शिवाला की आरती के प्रान मेरे राम,
रमजान की अज़ान के भगवान् मेरे राम।

काशी काबा और चारो धाम मेरे राम,
ज़मीन पे अल्लाह का इक नाम मेरे राम।

दर्द खुद लिया दिया मुसकान मेरे राम,
ज़हान में मुहब्बते -फरमान मेरे राम।

रहमत के फ़रिश्ते रहमान मेरे राम,
सौ बार जाऊ तुझ पर कुरबान मेरे राम।

हर करम पे रखे ईमान मेरे राम,
तारीख में है आफताब नाम मेरे राम।

वतन में मुश्किलों का तूफ़ान मेरे राम,
फिर से पुकारता है हिन्दुस्तान मेरे राम।

12 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

हर पुकार पर चले आते हैं मेरे राम
अब तुम्हारा ही आसरा है मेरे राम

बहुत खूबसूरत गज़ल

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

Nice .
बलात्कार पर सर्वथा अद्भुत चिंतन
http://www.ahsaskiparten.blogspot.com
पर , आज, अभी तुरंत ।
भाई पवन जी, आप अभी तक आए नहीँ ?
आइये और देखिए
हमारे यहाँ भी तशराफ़ लायेँ और हल सुझाएँ

बलात्कार एक ऐसा जुर्म है जो अपने घटित होने से ज़्यादा घटित होने के बाद दुख देता है, सिर्फ बलात्कार की शिकार लड़की को ही नहीं बल्कि उससे जुड़े हर आदमी को , उसके पूरे परिवार को ।
क़ानून और अदालतें हमेशा से हैं लेकिन यह घिनौना जुर्म कभी ख़त्म न हो सका बल्कि इंसाफ़ के मुहाफ़िज़ों के दामन भी इसके दाग़ से दाग़दार है ।

क्योंकि जब इंसान के दिल में ख़ुदा के होने का यक़ीन नहीं होता, उसकी मुहब्बत नहीं होती , उसका ख़ौफ़ नहीं होता तो उसे जुर्म और पाप से दुनिया की कोई ताक़त नहीं रोक सकती, पुलिस तो क्या फ़ौज भी नहीं । वेद कुरआन यही कहते हैं ।

अमित शर्मा ने कहा…

जयति कोशलाधीश कल्याण कोशलसुता, कुशल कैवल्य - फल चारु चारी ।
वेद - बोधित करम - धरम - धरनीधेनु, विप्र - सेवक साधु - मोदकारी ॥

amar jeet ने कहा…

पवन जी सार्थक पोस्ट
आपकी रचना पुकारे मेरे राम .................

अपर्णा "पलाश" ने कहा…

राम का नाम सदा ही मन में भक्ति और ज्ञान का भाव भर देता है , राम किसी ध्र्म का नही सत्कर्मो का नाम है -------

एक बार फिर से धरती पर आ जाओ मेरे राम
सच्चाई की राह फिर से दिखला दो मेरे राम

लड रही दुनिया ले लेकर राम तेरा नाम
कर रही है काम बुरे ले लेकर तेरा नाम

मै अज्ञानी मूरख कैसे बचाऊँ तेरा नाम
तुम ही दया करो कि कर पाऊँ , मै जग में सत्काम

amar jeet ने कहा…

इस बार मेरे ब्लॉग में '''''''''महंगी होती शादिया .............

Dr Kiran ने कहा…

राम का नाम सदा सुखदाई

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी इस रचना का लिंक मंगलवार 30 -11-2010
को दिया गया है .
कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

बड़े दिनों के बाद हम बेवतनो को याद, चर्चा मंच से 'गीत' के बोल सुनाई दिए.कभी खुद को देखू कभी मंच को.
शुक्रिया

ZEAL ने कहा…

.

शिवाला की आरती के प्रान मेरे राम,
रमजान की अज़ान के भगवान् मेरे राम।

जितनी भी तारीफ करूँ , कम होगी । इस उम्दा रचना के लिए बधाई।

.

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत सुंदर और सार्थक अभिव्यक्ति.... आभार

तदात्मानं सृजाम्यहम् ने कहा…

मुल्क की उम्मीद-ओ -अरमान मेरे राम,
इंसान की मुकम्मिल पहचान मेरे राम।

शिवाला की आरती के प्रान मेरे राम,
रमजान की अज़ान के भगवान् मेरे राम।

का हो जी, कमाल कर दिया। जारी रहो, जलते रहो। नक्शे-गजल चलते रहो।