बुधवार, 3 नवंबर 2010

उसी मासूमियत पे रहनुमाई झूम जाती है

आज तक मैंने ब्लॉग पर जो कुछ भी लिखा है वह मेरी ज़िंदगी के तजुर्बे और महसूस करने पर आधारित रहा है.मैने  अपनी पोस्ट के माध्यम से अपने को उकेरने की कोशिश की है. मै इस बात को मानता हूँ कि रचना करना ही जीवन है. ब्लोगिंग के माध्यम से मै अपनी जीवन्तता बनाये रखने का प्रयास करता हूँ.इस क्रम में कदाचित दूसरो को खुशी का एक टुकड़ा भी दे पाऊ तो मेरी जीवन्तता और रचनात्मकता दोनों सार्थक प्रतीत होने लगती है. कल मेरे एक फालोवर ने पूछा कि आप कि रूमानी कविताओं की नायिका कौन है. उसके उत्तर में मै  आज आपको मै वो गीत भेट करने जा रहा हूँ जो मैंने आज से पाच साल पहले लिखा था. उस समय एक लडकी मुझे  ना जाने क्यू बहुत अच्छी लगती थी.वो जब मुझसे बात करती थी तो आसपास के लोग जाने क्यू मुझसे अजीब किस्म का व्यवहार करने लगते. शायद उसका मुझसे बात करना लोगो को अखरता था. कुमार नयन की एक ग़ज़ल के चन्द अशरार है
नज़र नीची लबों में  हो दबी मुस्कराहट तो
उसी मासूमियत पे रहनुमाई झूम जाती है
गजलसे जब तुम्हारे प्यार की खुशबू छलकती है
कसम अल्लाह की सारी खुदाई झूम जाती  है
लेकिन मेरे साथ तो उल्टा हुआ. सारी खुदाई मेरे विरुद्ध ...........
ग़ालिब बोल पड़े ये इश्क नहीं आसाँ एक आग का दरिया है और डूब के जाना है.
मैंने जो महसूस किया आप भी उससे रूबरू होइए.....
कुछ अपने छूटा करते है
कुछ शीशे टूटा करते है
बालू के बने घरोंदे तो
इक  दिन फूटा ही करते है
तारो से क्या लेना देना
यद्यपि आते है आँगन में
मेरा चाँद निकलेगा इक दिन
तारे टूटा ही करते है
हम अभिमानी निर्भय होकर
बीच राह से गुजरेगे
जब बाग़ से फूल चुराया है तो
माली रूठा ही करते है...
              आपको बता दे कि वह लडकी आज भी मेरे साथ रहती  है मेरी माँ उससे कहतीं  है.. अरे बहू जरा चाय तो बना. किरण कहती है जी मांजी .......



16 टिप्‍पणियां:

Manish ने कहा…

कुछ अपने छूटा करते है
कुछ शीशे टूटा करते है
बालू के बने घरोंदे तो
इक दिन फूटा ही करते है
..............
............
जब बाग़ से फूल चुराया है तो
माली रूठा ही करते है...

Mazza aa gayi.

Harshkant tripathi"Pawan" ने कहा…

हम अभिमानी निर्भय होकर
बीच राह से गुजरेगे
जब बाग़ से फूल चुराया है तो
माली रूठा ही करते है.
अच्छा लगा जानकर की आपने जिसके लिये इतना कुछ लिखा है और लिखते आ रहे है वो आपके साथ है. दुनिया ने तो अभी ट्रेलर देखा है, अभी तो पूरी मूवी बाकि है. उम्मीद करता हूँ कि एक दिन सारी दुनिया आपके रचनात्मकता और अभिव्यक्ति की कायल होगी. अंतिम चार पंक्तियाँ बहुत अच्छी लगीं....

ZEAL ने कहा…

हम अभिमानी निर्भय होकर
बीच राह से गुजरेगे
जब बाग़ से फूल चुराया है तो
माली रूठा ही करते है...

aapko aur kiran ji ko shubhkaamnaayein.

.

ZEAL ने कहा…

sundar kavita aur bhaav !

chandra ने कहा…

१............
नंबर वन
पवन और किरन

पलाश ने कहा…

aap bahut kismat wale hai ki aapke sapne haquekat bane. eswar aapko aapko ese hi khushiyaan deta rahe

sandhyagupta ने कहा…

मै इस बात को मानता हूँ कि रचना करना ही जीवन है.

aapki baat se sahmat hoon.

कुछ अपने छूटा करते है
कुछ शीशे टूटा करते है
बालू के बने घरोंदे तो
इक दिन फूटा ही करते है

sundar aur bhavpurn.

Dr Kiran ने कहा…

badlegee ritue ada par mai rahoogee sada teri baho me har lamha har pal...........

Abhinav Chaurey ने कहा…

वाह क्या सुखद कहानी एवं मधुर कविता है। आप बहुत भाग्य शाली हैं.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

कुछ अपने छूटा करते है
कुछ शीशे टूटा करते है
बालू के बने घरोंदे तो
इक दिन फूटा ही करते है

पर ये बहुत ख़ुशी की बात है आपका घरोंदा बरकार है ... टूटा नहीं ... बहुत बहुत शुभकामनाएं ...

बेनामी ने कहा…

गजलसे जब तुम्हारे प्यार की खुशबू छलकती है
कसम अल्लाह की सारी खुदाई झूम जाती है
mujhe maaloom tha ki tum yaha jarror miloge...
fir kabhi.........

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

बेनामी जी कृपया आप अपना परिचय तो दे दिए होते तो ठीक बात होती, खैर आप जो कोई भी हो छुपाने कि आदत में सुधार करिए नही तो जीवन में अनावश्यक कठिनाइया आयेगी

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

तारो से क्या लेना देना
यद्यपि आते है आँगन में
मेरा चाँद निकलेगा इक दिन
तारे टूटा ही करते है
वल्लाह .....!!
पवन और किरण की ये जोड़ी बनी रहे ....!!

एस.एम.मासूम ने कहा…

किरण कहती है जी मांजी .....सच मैं? वो भी आज के युग मैं?

यस चंचल ने कहा…

ap se kuchh kahne ka mn hua lekin kuchh kh nahi pa rhe hain

pratishtha ने कहा…

der se hi sahi par badai pawan apko for everything...