रविवार, 31 अक्तूबर 2010

मीठी सी लौ भर रही चारो ओर मिठास

खेतों में बागो में दियना करे उजास,

मीठी सी लौ भर रही चारो ओर मिठास.

दसो दिशाओं में घुली भीनी-भीनी गंध,
कण-कण पुलकित हो उठे लूट रहे आनंद.

नयी फसल लेकर आयी घर में गुड और धान,
लईया खील बताशों से अभिनंदित मेहमान.

गेरू गोबर माटी से लिपा पुता है गाँव,
घर से भगे दलिद्दर सर पे रखकर पाँव.



झांझ मजीरा ढोलक बाजे झूम रही चौपाल,
नाचे मन हो बावरा देकर ताल पे ताल.


फूटी मन में फुलझड़िया पूरण होगी आस,
परदेसी पिऊ आ गए गोरी ने छुआ अकास.

दीवाली ने कर दिया ज्योतिर्मय संसार,
सबके आँगन में खिले सुख समृद्धि अपार.

7 टिप्‍पणियां:

पलाश ने कहा…

बहुत खुशहाल दीवाली का चित्रण किया है , किन्तु यह तो एक पहलू है , दूसरा पहलू भी है जहां किसान कर्ज के बोझ से दबा हुआ है दीवाली के दिये , खील गट्टे , बच्चों के कपडे लाने के लिये भी वो जमीदार या बडे किसान से कर्ज लेता है , दीवाली की रात जब पूरा परिवार खुशियां मना रहा होता है , उसको कर्ज चुकाने की चिन्ता सताती है

sheeba ने कहा…

nice imagination...

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

दीवाली ने कर दिया ज्योतिर्मय संसार,

सबके आँगन में खिले सुख समृद्धि अपार.

Behad sunder... arthpoorn... Diwali ki shubhkamnayen

दिगम्बर नासवा ने कहा…

झांझ मजीरा ढोलक बाजे झूम रही चौपाल,
नाचे मन हो बावरा देकर ताल पे ताल....

बहुत उत्तम ... लाजवाब छंद हैं ... गज़ब का लिखते हैं आप ...
आपको और आपके परिवार को दीपावली की शुभकामनाएं ....

Sanjay Vaid Mehta ने कहा…

आपको और आपके परिवार को दीपावली की शुभकामनाएं

chandra ने कहा…

आपकी रचनाओं के दीप यू ही प्रकाशित होते रहे
शुभ दिवाली

Jai Hind Pandey ने कहा…

Good representation of festival Deepavli in Indian style. A lesson request of all that fulfil the the heart by pleasure in the deepavali.