बुधवार, 20 अक्तूबर 2010

दोगलापन-3(जय लंकेश मिटे समाज का क्लेश)

दशहरे के दूसरे दिन का अख़बार पलट रहा था कि एक जगह मेरी नज़र ठिठक गयी समाचार का शीर्षक था जय लंकेश मिटे समाज का क्लेश. आगे उसमे गौतम बुद्ध बी. आर अंबेडकर और बी कितने महापुरुषों की जय जयकर लगाई गयी थी.अब रावण का बौद्ध धर्म से क्या लेना-देना आज कल महापुरुषों को गाली देकर या उनका अपमान कर सस्ती लोकप्रियता और छपासू बनने का एक बेढंगा ढर्रा चल पड़ा है.जब भी मन करे तो राम को गाली दे दो आंबेडकर की मूर्तियों का अपमान करो राष्ट्रपिता की खिल्ली उडाओ संविधान को नकार दो इससे आप मीडिया में छा जाते हो. अब इस किसिम के लोगो ने ऐलान किया है कि रावण की भव्य मूर्तिया गाँव-गाँव लगाई जायेगी और रावण राज कि स्थापना की जायेगी. जय लंकेश श्त्रोत्र की भी रचना कर ली गयी है........... मुझे तो अभी पता नहीं है कि इसमें क्या शब्द है फिर भी आइये कुछ मंत्रो का जाप कर लिया जय नहीं तो ये तालिबान के औलाद सर कलम का फतवा जारी कर देगे.



जय लंकेश जय लंकेश
मिटे समाज का क्लेश
इक वनवासी की नार चुराई
धर साधू का भेष

चोरी डाका कतल और बलवा
 कछु ना रहा था शेष
 जय लंकेश जय लंकेश

पढ़ा लिखा लादेन सरीखा
आतंकवादियों का नरेश
जय लंकेश जय लंकेश
         
इस स्त्रोत्र को रोज़ सुबह शाम गन्दा नाला में नहा कर पाठ करिए. लंकेश के गुण धीरे से आपमें भी आ जायेगे और आप सारे पापो से युक्त होकर शीघ्र ही परम(कु)धाम को प्राप्त होगे.........

जय बाबा लंकेश.....................

आज हिन्दुस्तान में एक मजबूत डंडे की जरूरत है जो इन जैसे तमाम खब्तियो का उपचार कर सके ............

जय हिंद ...........

2 टिप्‍पणियां:

Harshkant tripathi"Pawan" ने कहा…

आप कब से इस लंकेश के चक्कर में पड़ गये और उसके बारे में लिखने लगें. पोस्ट अच्छी है. आज बहुत दिन बाद ब्लॉग पे आना हुआ, पिछली पोस्टें भी भी अच्छी लगीं.

पलाश ने कहा…

पापियों को कुमार्ग पर जाने का सरलतम मार्ग दिखाने के लिये धन्यवाद । कम से कम बाकी जगहों पर उन्को पाप कमाने के लिये नही जाना पडेगा । कुछ मार्ग सदाचारियों को भी दिखा दीजिये