गुरुवार, 7 अक्तूबर 2010

मुझमे मेरा जो कुछ है वो तेरा ही निमित्त है माँ















अपनी दुर्बलताओ से जीतू शक्ति देना जगदम्बे
दुनियावी जालो  से निकलू संबल देना माँ अम्बे

जयकारा रतजगा जागरण कभी नहीं कर पाऊंगा
मन ही मन  में एक बार बस एक बार तुम्हे बुलाऊंगा

मेरी मद्धिम  सी पुकार पर तुमको आना होगा
मै सोया रहता हूँ माते  मुझे जगाना होगा

भले बुरे का परिचय देना और अंधेरो में ज्योति
गहरी पीड़ा से मुक्ति नहीं सहने की देना शक्ति

अंधियारों में दीपक बन  जल जाने की इच्छा है
मानवता की सेवा में बलि जाने की इच्छा है

सदा रहे आशीष तुम्हारा छोटी सी ये अर्जी  माँ
मुझमे मेरा जो कुछ है वो तेरा ही  निमित्त  है माँ

                            मुझमे मेरा जो कुछ है वो तेरा ही  निमित्त  है माँ

1 टिप्पणी:

पलाश ने कहा…

ढोल नगाडे की ध्वनि नही अपितु
माँ ह्दय वेदना सुनाती हैं
बहुमूल्य रत्न से नही अपितु
माँ भक्ति से खुश होती हैं
इतनी सच्ची आराधना सुनकर
माँ दर्शन देने तुमको आयेंगी
इच्छायें पूरी तुम कर पाओ
ऐसी शक्ति भी दे कर जायेगीं
ईश्वर आपकी मनोकामनायें पूरी करें