मंगलवार, 28 सितंबर 2010

अब का होगा परधानी में.........













अब का  होगा परधानी में
जब भैंस कूद गयी पानी में

गाँव  गाँव मा आग लगी है
हर कुअना मा भांग पड़ी है
कितने बकरा कटी जावेगे
मंत्रीजी  के अगवानी में

पंडिज्जी अब हाथी पूजे
राम छोड़ माया को खोजे
जब माल कट रहा  घर बैठे
तब का रखा जजमानी में

एक गाँव में सौ ठू दल है
पूरा गाँव बना  दलदल है
लरिका खेले  बम कट्टा से
गारी रटी जबानी में.

साल में पच्चीस लाख दिख रहा
रस्सी बनती सांप दिख रहा
चिड़िया उड़ गयी खेत खाय के
गुलफाम मरे जवानी में

चौरा मैया का द्वार  बट गया 
गाँव का त्यौहार बट गया
अलगू जुम्मन पंच परमेश्वर
बस बाते बची कहानी में  
                  अब का होगा परधानी में









6 टिप्‍पणियां:

निर्मला कपिला ने कहा…

पंडिज्जी अब हाथी पूजे
राम छोड़ माया को खोजे
जब माल कट रहा घर बैठे
तब का रखा जजमानी में
वाह बहुत खूब कहा है। धन्यवाद।

ZEAL ने कहा…

एक गाँव में सौ ठू दल है
पूरा गाँव बना दलदल है
लरिका खेले बम कट्टा से
गारी रटी जबानी में...

sateek chitran !

.

Harshkant tripathi"Pawan" ने कहा…

पूरा गावं है डूबा रहता परधानी और दीवानी में
चलिए गावं दिखाते हैं क्या-क्या नहीं है परधानी में.
अच्छी पोस्ट.

पलाश ने कहा…

आपके विचार वाकई गम्भीर हैं , बहुत खूबसूरत व्यंग है
आपके प्रश्न का उत्तर देने की छोटी सी कोशिश की है

अच्छे की उम्मीद ना छोडो
बुराई से ना नाता जोडो
आयेगा फिर से सतजुग
खिलेगा फूल वीरानी में

देश की सेवा करनी होगी
तुमको परधानी लेनी होगी
अब लिखने का समय है बीता
कुछ कर लो भरी जवानी में

वरना इक दिन कुछ ना बचेगा
समय दुर से खडा हसेगा
तेरे संग उस दिन हम भी कहेगें
अब का होगा परधानी में

Aditya Tripathi ने कहा…

लिखते लिखते ब्लॉग भर गवा
पढ़ते पढ़ते समय खप गया
कलम उठाओ लिख डालो अब
एक चिट्ठी राजधानी में

परधानी को ताक़ में रख कर
भगवान का नाम ही जप कर
जो करना है कर डालो अब
पर बच्चू सावधानी में

जब करने को मन ने चाहा
सामने खुलता राह दिख रहा
बात तो एकदम सच्ची है ये
नहीं है कुछ परधानी में

Manish ने कहा…

Bahut Achcha Hasya Vyangya.......