गुरुवार, 26 अगस्त 2010

...खुशियों से ता-उम्र का करार किया जाय










हंसते हुए जीवन को  संवार  लिया जाय
खुशियों से ता-उम्र का करार किया जाय

उड़ते हुए बादल मस्ती में झूमते है
मस्ती ही जीवन है हमसे ये कहते है
मस्ती में हर घड़ी को गुज़ार लिया जाय

सतरंगे इन्द्र धनुष से कुछ  रंग चुराकर
सांझ की धूप  को आँगन में बुलाकर
बीते हुए लम्हों को दुलार लिया जाय

निशिगंधा की महक  साँसों में भरकर
ओस की बूंदों में तन मन घोलकर
खिली हुयी चाँदनी से प्यार किया जाय
                    ...खुशियों से ता-उम्र का करार किया जाय

2 टिप्‍पणियां:

Harshkant tripathi"Pawan" ने कहा…

खिली हुयी चाँदनी से प्यार किया जाय
खुशियों से ता-उम्र का करार किया जाय
bahut khub.

आशीष/ ਆਸ਼ੀਸ਼ / ASHISH ने कहा…

डॉ साब,
बहुत खूब!
आपकी अनुमति से....
क्यूँ ना ग़मों को फ़रार किया जाए,
ज़िंदगी को गुल-ए-गुलज़ार किया जाए!
हर किसी से बेहद प्यार किया जाए,
बेशक.....
खुशियों से ता-उम्र का करार किया जाए!
आशीष
--
बैचलर पोहा!!!