शुक्रवार, 16 जुलाई 2010

कुछ फूलों कि बाते हो
















कुछ फूलों की  बाते हो कुछ प्यार की  बाते हो
कुछ तितली की बाते हो कुछ मनुहार की बाते हो
        
ज्ञान की  बाते हो कुछ विज्ञान की  बाते हो
हँसी ख़ुशी की  बाते हो कुछ मुस्कान की  बाते हो
                 
नीले आसमान के नीचे बरगद की  शाखों के पीछे
 कुछ धूप की  बाते हो कुछ छांव की  बाते हो      
 
मीठी लोरी को सुनकर माँ के आँचल में छुपकर
सपनो की  बाते हो कुछ परियो की  बाते हो
                                  
 कुछ फागुन का रंग चढ़े कुछ सावन की  बरसाते हो
 कुछ बचपन की  बाते हो कुछ यौवन की  बाते हो

6 टिप्‍पणियां:

sandhyagupta ने कहा…

मीठी लोरी को सुनकर माँ के आँचल में छुपकर
सपनो की बाते हो कुछ परियो की बाते हो

bahut sundar.shubkamnayen.

माधव ने कहा…

सुन्दर पोस्ट

पलाश ने कहा…

कितना सुन्दर ख्वाब सजाया तुमने अपनी कविता में
बचपन यौवन का संगम बसाया तुमने कविता में
इन्द्रधनुष के रंगों को भर डाला इस कविता में
सात सुरों से सजी रागिनी सुनती हूँ मै कविता में
भूली बिसरी बातों को मैने पाया इस कविता में
अपने अतीत की छाया को देखा मैने इस कविता में

Manish ने कहा…

Bahut bahut achchi lines hai......

Harshkant tripathi ने कहा…

बचपन से यौवन तक की सैर कराती इस कविता में शब्द चयन और तुकबंदी वाकई काबिले तारीफ है.

Dr Kiran ने कहा…

baat karne ko kitna kuchh hai. palash ke comment ka kahana hi kya