रविवार, 4 जुलाई 2010

पथ पर चलता चल राही













पथ पर चलता चल राही
यद्यपि संग नहीं कोई,
पथ ही तेरी मंजिल है
अंतिम लक्ष्य नहीं कोई.
आज मिले जो मरुथल तुझको
कल मिलना निश्चित मधुवन,
प्राण छूटने से चिंतित क्यों
मृत्यु पार  भी है जीवन.
जहा पड़ेगे कदम तुम्हारे
राह वही बन जायेगी,
तेरे बाद उसी रास्ते
नयी पीढियां  आयेंगी.

9 टिप्‍पणियां:

पलाश ने कहा…

ये ना सोचो तुम हो अकेले
साथ तेरे विश्वास है
हो संग हर पल तेरे चलता
वो अनन्त आकाश है

past life therapy ने कहा…

nice

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

जहा पड़ेगे कदम तुम्हारे
राह वही बन जायेगी,
तेरे बाद उसी रास्ते
नयी पीढियां आयेंगी.

वाह सकारात्मक सोच लिए छंद बद्ध अगली पीढ़ी को राह दिखाती सुंदर कविता ......!!

आखिर तक जो दो बोरी किताबों की जो साथ लाये थे वही काम आएगी ....
बहुत खूब ......!!

Dr Kiran ने कहा…

तुम कही भी जाओ मुझे हमेशा साथ पाओगे.

Dr Kiran ने कहा…

tum akele nahi ho sakte mai hamesha poori takat ke saath tumhaare saath hoo

Dr Kiran ने कहा…

i always with you

sandhyagupta ने कहा…

Sarthak rachna.yun hi likhte rahen.

Dr Kiran ने कहा…

i always with you

बेनामी ने कहा…

Nice philosophical lines......