बुधवार, 30 जून 2010

तुम भी कही भीगती होगी..........

सावन की सीली हवाएं
जब तन से मेरे टकराती है,
तुम्हारे कोमल छुअन की यादें
मुझे  पुकार जाती है.
धुली और पनियल सडको से
काफी हाउस आना,
घुमड़ते कारे बादलो की
फुआरों में भीज जाना.




तुम्हारे बालो का गीलापन
मेरे कंधे पर होता था,
सारा रेगिस्तान मेरा
उस पल को गायब होता था.
तुम्हारे साथ बिताई हुयी
हर शाम याद आती है,
जिस बात पर हंसी थी तुम
वो बात याद आती है.
आगे सावन बरसे ना बरसे
लेकिन बारिश लम्बी होगी,
मेरी आँखों के बादल से
तुम भी कही भीगती होगी.
तुम भी कही भीगती होगी..........







9 टिप्‍पणियां:

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

मेरी यह रचना इन्टरनेट कैफे से पहले युग के उन सभी (पूर्व)तरुण तरुणियो के लिए है जो आज भी उस समय को शिद्दत से अपने दिल में संजोये है.

Dr KIRAN ने कहा…

aapki kavitaao me doobne ka man karta hai

past life therapy ने कहा…

kiya bat hai sir g

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

एम्.ए. में स्वर्ण पदक प्राप्त किया. मूलतः संकोची हूँ.लेकिन एक बार बातचीत के बाद आप मुझे बातूनी कह सकते हो.......

.बहुत खूब .....!!

जिस बात पर हंसी थी तुम
वो बात याद आती है.

कविता के लिए भारी भरकम शब्दों की जरुरत नहीं होती ......

बस वो जो दिल को छू जाये ....
पढ़ कर लगे की कुछ पढ़ा है .....
जैसे आपकी ये दो पंक्तियाँ......

आशीष/ ASHISH ने कहा…

Maikya Dr. Saab,
Chha gaye aap!
Bahut kuchh yaad dila diya prabhu!!!
Jai Ho!
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Its tough to be a bachelor!

पलाश ने कहा…

एक सुखद अह्सास के साथ इतनी गम्भीर वेदनाओं को एक ही साथ पिरो देने की आप को बधाई।

sheeba ने कहा…

very meaningfull....as well as touching too.

ram ने कहा…

aisa to jroor, tha jab main bhi kabhi un barish ki bundon main bhiga krta tha...........

Manish ने कहा…

तुम्हारे साथ बिताई हुयी
हर शाम याद आती है,
जिस बात पर हंसी थी तुम
वो बात याद आती है.
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