बुधवार, 2 जून 2010

तुम्हारी याद ...............


अकेले में तुम्हारी याद आना

अच्छा लगता है,

तुम्ही से रूठना तुमको मनाना

अच्छा लगता है।

धुन्धलकी शाम जब मुंडेर से

पर्दा गिराती है,

सुहानी रात अपनी लट बिखेरे,

पास आती है,

तुम्हारा चाँद सा यूँ छत पे आना,

अच्छा लगता है।

फिजाओं में घुली रेशम नशीला

हो रहा मौसम,

ओढ़कर फूल का चादर सिमटती

जा रही शबनम,

हौले से तुम्हारा गुनगुनाना

अच्छा लगता है।

अकेली बाग़ में बुलबुल बिलखती है

सुलगती है,

रूमानी चांदनी मुझपर घटा बनकर

पिघलती है,

तुम्हारा पास आना मुसकराना

अच्छा लगता है

अकेले में तुम्हारी याद आना

अच्छा लगता है।


8 टिप्‍पणियां:

दिलीप ने कहा…

badhiya sundar

Manish ने कहा…

Nice romantic lines.

वन्दना ने कहा…

waah..........bahut hi sundar andaz-e-bayan hai.

Dr KIRAN ने कहा…

ye kiski yaad hai

Shekhar Kumawat ने कहा…

u hi aap ki kavitayen padna chha lagta he

badhai aap ko is kle liye



interesting likhte hain aap .

past life therapy ने कहा…

shandar kiya likha hai sir

पलाश ने कहा…

blog par aapki rachna ka aana achchha lagta hai
readers ki sankya ka badna achchha lagta hai
bhawanao ka youn sabdon mai pirona achchha lagta hai
sadgi se etna kuch kahna achchha lagta hai.

Harshkant tripathi ने कहा…

sab kuchh achha hai ji...........