मंगलवार, 1 जून 2010

हिन्दुस्तान बदल रहा है.......

महबूब-ए-मुल्क की हवा बदल रही है,
ताजीरात-ए-हिंद की दफा बदल रही है.
अस्मत लुटी अवाम की कहकहो के साथ,
और अफज़लो की सजा बदल रही है.
बारूदी बू आ रही है नर्म हवाओ में,
कोयल की भी मीठी ज़बा बदल रही है.
सुबह की हवाखोरी भी हुई मुश्किल,
जलते हुए टायर से सबा बदल रही है.
सियासत ने हर पाक को नापाक कर दिया,
पंडित की पूजा मुल्ला की अजां बदल रही है.
कहने को वह दिल हमी से लगाए है,
मगर मुहब्बत की वजा बदल रही है.
दुआ करो चमन की हिफाजत के वास्ते,
बागबानो की अब रजा बदल रही है।
निगहबानी करना बच्चो की ऐ खुदा,
दहशत में मेरे शहर की फ़ज़ा बदल रही है.
महबूब-ए-मुल्क की हवा बदल रही है.

10 टिप्‍पणियां:

माधव ने कहा…

nice

gurudevji ने कहा…

बहुत उम्दा नज्म है। बधाई स्वीकारें।

paramjitbali-ps2b ने कहा…

बहुत उम्दा व सामयिक रचना है। आज की सच्चाई ब्यान करती रचना है। बधाई।

sangeeta swarup ने कहा…

बहुत खूबसूरत....सच्चाई बयां करती हुई

M VERMA ने कहा…

अस्मत लुटी अवाम की कहकहो के साथ,
और अफज़लो की सजा बदल रही है
बहुत खूब ... क्या स्वर है
लाजवाब

Riteshhhh... Blogs... ने कहा…

Chooo Gayi Dil ko Keep it up bhaiya..abhi bahut kuch nikalna baaki hai apne vichaaro se saarobaar kar do bharat ko...vande mataram

Dr KIRAN ने कहा…

ita real status of India

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

कल मंगलवार को आपकी रचना ... चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर ली गयी है



http://charchamanch.blogspot.com/

स्वप्निल कुमार 'आतिश' ने कहा…

gud one...achhi padtal vartman hindustaan ki

माधव ने कहा…

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