सोमवार, 31 मई 2010

मेरे राम


मुल्क की उम्मीद-ओ -अरमान मेरे राम,

इंसान की मुकम्मिल पहचान मेरे राम।

शिवाला की आरती के प्रान मेरे राम,

रमजान की अज़ान के भगवान् मेरे राम।

काशी काबा और चारो धाम मेरे राम,

ज़मीन पे अल्लाह का इक नाम मेरे राम।

दर्द खुद लिया दिया मुसकान मेरे राम,

ज़हान में मुहब्बते -फरमान मेरे राम।

रहमत के फ़रिश्ते रहमान मेरे राम,

सौ बार जाऊ तुझ पर कुरबान मेरे राम।

हर करम पे रखे ईमान मेरे राम,

तारीख में है आफताब नाम मेरे राम।

वतन में मुश्किलों का तूफ़ान मेरे राम,

फिर से पुकारता है हिन्दुस्तान मेरे राम।

फिर से पुकारता है हिन्दुस्तान मेरे राम।





10 टिप्‍पणियां:

Manish ने कहा…

Kya likhu Mere Ram

पलाश ने कहा…

राम से अब क्या कहे , सब आप ने ही कह दिया
दिलों से निकल कर राम ,अब तो मंदिरो में रह गया
हे राम सुन लो अब तो पवन की पुकार को
राम राज्य देख्ने को ये मन मेरा भी मचल गया

Riteshhhh... Blogs... ने कहा…

Bahut badhiyaa likha hai....man ko aisa choo gaya hai ki kya bataoo...urdu aur hindi ka aisa sangrah deegar hee padhne ko milta hai...aap ki is koshish ko hamara salaam....aur hum allah se dua karenge ki yu hi aapke vichaar hume milte rahe aur hum un vichaaro se labhanvit hote rahe...

Jai Hind Pandey ने कहा…

Ram may sansar aur ram hee rakshak koi dharmik seemaa nahee sab dharmon ke adarsh mere Ram

Dr KIRAN ने कहा…

ganga jamuni tahzeeb ka ek sundar tareeka hai
itni achhi rachna ke liye badhai ho

दिलीप ने कहा…

jay shri raam...

kunwarji's ने कहा…

जय श्रीराम.....

कुंवर जी,

mohammad ने कहा…

this is a very enlightening poetry which overhelm young talented minds.

sanu shukla ने कहा…

jai jai ram

बेनामी ने कहा…

Hamare hirday me rahane wale RAM, MAN RANJAN mere ram ,sadguno ke swaroop mere RAM ,MERE GANDHI KE :HE RAAAAAAM"
ram,ram, ram ram,,,,,,,,raaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaam
Ram Ji