शनिवार, 29 मई 2010

हराम का खाना

एक मेढ़ा और एक गाय दोनों साथ - साथ रहते थे। मेढ़े को खाने के लिए खूब हरी घास अनाज और ढेर सारी पौष्टिक चीजे मिलती जबकि गाय और उसके बछड़े को रूखा सूखा भूसा मिलता मेढा अपने भाग्य पर खूब घमंड करता। गाय का बछड़ा इस बात से परेशान होकर अपनी माँ से इसका कारण पूछा तो गाय ने उसे समझाते हुए कहा कि बिना मेहनत या उचित प्रतिफल दिए हुए मिला भोजन सदैव दुखदायी होता है इसलिए मेरे बच्चे तू मेहनत से मिली हुई चीजो से पेट भरना सीख हराम का खाना एक दिन जीवन का अंत करवा देता है। बछड़ा बोला तो कुछ नहीं पर ये बात समझ न पाया। एक दिन उसने देखा कि एक आदमी छुरा लिए आया और मेढ़े को लेकर चल दिया। बछड़ा डर गया। जब मोटे ताजे मेढ़े की गर्दन पर छुरा चलने लगा तो उसे माँ की बात समझ में आई कि हराम के खाना का मूल्य क्या होता है।

3 टिप्‍पणियां:

Dr KIRAN ने कहा…

haram ki kamai karne walo ke liye sabak

prem ने कहा…

hi sir that is nice blog

संजय अनेजा ने कहा…

इसका मतलब ये हुआ कि हराम की खाने वाले को हलाल होना पड़ता है :)