सोमवार, 9 नवंबर 2009

Vande Mataram

वंदे मातरम का विरोध करने वाले लोग या तो बावले हो गए हैं, या अपनी राजनितिक रोटी माताओं के शवो पर सेकना चाहते है। मुझे तो ये चतुर सुजान लोग दीखते है। हिंदुस्तान की नीति अब क्या पागल और मानसिक दिवालिया लोग निर्धारित करेगे या माता का अपमान करने वाले ? ये लोग अपने बेटे बेटियों और बहुओ पर ध्यान दे तो ज्यादा अच्छा हो। धर्म व्यक्तिगत मसला है। सरकार केचुए की तरह है उसे वोट बैंक की चिंता है । अगर फतवा जारी करना हो तो अशिक्षा के खिलाफ जारी हो प्रदूषण के खिलाफ हो कुपोषण के खिलाफ हो। दौडे छूटे माँ की वंदना के खिलाफ फतवा जारी कर दिया।
ऐसे लोगो को समाज से धक्के मार कर बाहर कर देना चाहिए । यह जिम्मेदारी हर प्रगतिशील सोच वाले भारतीय की है।

1 टिप्पणी:

Harshkant tripathi ने कहा…

bat to sahi hai lekin in sab ke liye aage kaun aaye. post padhkar, tv dekhkar ya fir kisi aur madhyam se log imprss to ho jate hain lekin use karya roop kaun dega???????????